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Dindori Ranks Second in India for Water Conservati

जल संरक्षण में डिंडौरी देश में दूसरे नंबर पर: जनभागीदारी से बनीं 6.26 लाख से अधिक जल संरचनाएं

मध्यप्रदेश का डिंडौरी जिला जल संरक्षण में देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंचा। जनभागीदारी से 6.26 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया।


जल संरक्षण में डिंडौरी देश में दूसरे नंबर पर जनभागीदारी से बनीं 626 लाख से अधिक जल संरचनाएं

डिंडौरी। मध्यप्रदेश का डिंडौरी जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में मिसाल बनकर उभरा है। जल संरचनाओं के निर्माण और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार के मामले में डिंडौरी ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। पिछले दो महीनों में जनभागीदारी के माध्यम से जिले में 6 लाख 26 हजार 955 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया है।

जिले में जल संरक्षण को लेकर चलाए गए व्यापक अभियान के तहत ग्रामीणों ने स्वयं आगे बढ़कर सोखता गड्ढे, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, कंटूर ट्रेंच, तालाबों के जीर्णोद्धार और जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें समझाया कि पानी को रोककर ही भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद लोगों ने अपने स्तर पर जल संचय के प्रयास शुरू किए।

हर घर में जल संरक्षण की पहल

बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में लगभग 350 घर हैं। यहां अधिकांश घरों में सोखता पिट बनाए गए हैं और छतों के वर्षाजल को संरक्षित करने के लिए पाइप आधारित व्यवस्था विकसित की गई है।  आजीविका परियोजना के तहत संचालित ‘मां की बगिया’ योजना में हितग्राहियों द्वारा आम और नींबू के पौधे लगाए गए हैं। पौधों की सिंचाई के लिए टपक पद्धति (ड्रिप इरिगेशन), हांडी तकनीक और स्लाइन बोतलों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी की बचत के साथ पौधों की बेहतर देखभाल संभव हो रही है।

तालाबों और स्टॉप डैम का हुआ जीर्णोद्धार

जनपद सदस्य धर्म सिंह धुर्वे और उपसरपंच रघु परस्ते के अनुसार गांव में मौजूद चार तालाब और 12 स्टॉप डैम का पुनर्जीवन कराया गया है। इसके अलावा पहाड़ियों पर सैकड़ों कंटूर ट्रेंच खोदे गए हैं, जिससे वर्षाजल को भूमि में समाहित करने में मदद मिलेगी। आगामी मानसून में बड़े स्तर पर पौधरोपण की भी तैयारी की जा रही है।

भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद मिली सफलता

अमरपुर जनपद की भाखा मॉल ग्राम पंचायत में ग्रामीणों ने स्वयं के खर्च से जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की हैं। यहां सैकड़ों कंटूर ट्रेंच, सोखता गड्ढे और तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य किया गया है। स्थानीय प्रशासन लगातार निगरानी और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। 

कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि जिले की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि अधिकांश आबादी पठारी और दूरस्थ क्षेत्रों में निवास करती है। जल शक्ति मंत्रालय के निर्देशों के बाद गांव-गांव में जल चौपाल और रात्रि चौपाल आयोजित कर लोगों को जागरूक किया गया। इसी का परिणाम है कि आज डिंडौरी देश में जल संरक्षण के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर आंध्र प्रदेश का अल्लूरी सीताराम राजू जिला 6.89 लाख जल संरचनाओं के साथ पहले स्थान पर है, जबकि डिंडौरी ने दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

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