धार की भोजशाला में CM मोहन यादव ने सरस्वती लोक और भोज शोध संस्थान बनाने का ऐलान किया। आंदोलन में शहीद हुए लोगों के परिवारों को आर्थिक सहायता भी दी गई।
धार। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोमवार को धार पहुंचकर ऐतिहासिक भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन किए और बड़े सांस्कृतिक ऐलान किए। उन्होंने यहां ‘सरस्वती लोक’ और ‘भोज शोध संस्थान’ बनाए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने भोजशाला आंदोलन में जान गंवाने वाले तीन लोगों के परिवारों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया। कार्यक्रम के दौरान शहीद परिवारों को मंच पर सम्मानित किया गया। भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और आंदोलन के बीच सरकार के इस फैसले को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों नजरिए से अहम माना जा रहा है।
भोजशाला को सांस्कृतिक पहचान देने की तैयारी
सीएम मोहन यादव ने कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद भोजशाला को लेकर जो फैसला आया, वह धार के लोगों के धैर्य और आस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अब इस क्षेत्र को नई सांस्कृतिक पहचान देने का समय आ गया है। सरकार यहां ‘सरस्वती लोक’ विकसित करेगी, जबकि राजा भोज की विरासत और इतिहास पर रिसर्च के लिए ‘भोज शोध संस्थान’ भी बनाया जाएगा। सरकार इसे धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक अध्ययन के बड़े केंद्र के तौर पर विकसित करने की तैयारी में है।
आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिवारों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान भोजशाला आंदोलन में शहीद हुए लक्ष्मण सिंह पंचघाटी, बनसिंह अमझेरा और अंतर सिंह के परिजनों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा। इसके बाद परिवारों को 5-5 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की गई। सरकार के इस कदम को आंदोलन से जुड़े लोगों के प्रति सम्मान और राजनीतिक संदेश दोनों के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी ने भगवान राम के नाम पर लोगों को बांटने का काम किया। उन्होंने कहा कि अब धार का इतिहास बदलने लगा है और भोजशाला को उसकी पहचान वापस दिलाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि धार विकास की दौड़ में पीछे रह गया था, लेकिन अब ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के जरिए शहर को नई दिशा देने की कोशिश हो रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दे लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं।
विकास और जल संरक्षण कार्यक्रमों में भी शामिल हुए CM
भोजशाला कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोतीबाग चौक पहुंचे, जहां उन्होंने कई विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरण भी किया गया। इसके बाद सीएम देवी सागर तालाब पहुंचे और ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत श्रमदान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर काम किए जा रहे हैं और आने वाले समय में इसका असर दिखाई देगा।
भोजशाला मुद्दे पर फिर बढ़ेगी सियासत?
सरस्वती लोक और शोध संस्थान की घोषणा के बाद भोजशाला एक बार फिर राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस के केंद्र में आ सकती है। भाजपा इसे सांस्कृतिक पुनर्स्थापना के तौर पर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इस पर सरकार की राजनीति को लेकर सवाल उठा सकता है। फिलहाल सरकार भोजशाला क्षेत्र को धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन दृष्टि से बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।