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Chhattisgarh Anganwadi BaLA Plan

नक्सल मुक्त जिलों में आंगनबाड़ी भवनों की नई शुरुआत, छत्तीसगढ़ सरकार का BaLA मॉडल पर बड़ा प्लान

छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल मुक्त जिलों में 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को BaLA मॉडल पर विकसित करेगी। बच्चों और माताओं के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ मार्च 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


नक्सल मुक्त जिलों में आंगनबाड़ी भवनों की नई शुरुआत छत्तीसगढ़ सरकार का bala मॉडल पर बड़ा प्लान

Chhattisgarh News |

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित इलाकों से बाहर निकलकर विकास की रफ्तार अब बुनियादी ढांचे पर केंद्रित होती दिख रही है। सरकार ने बच्चों और माताओं की सुविधाओं को मजबूत करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को प्राथमिकता दी है। राज्य के नक्सल मुक्त जिलों में अब भी 500 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र भवनविहीन हैं। इन्हें चिन्हित कर जल्द निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का फोकस सिर्फ भवन बनाने पर नहीं, बल्कि इन केंद्रों को शिक्षा और पोषण का बेहतर मॉडल बनाने पर है।

नक्सल मुक्त जिलों में 506 केंद्रों का होगा निर्माण

छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग के जिलों में संचालित 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों की पहचान कर उनके लिए भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। इनमें बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जैसे जिले शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी गांव में आंगनबाड़ी केंद्र बिना भवन के न रहे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साफ कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ पोषण वितरण का स्थान नहीं हैं, बल्कि यह बच्चों के शुरुआती विकास और मातृ स्वास्थ्य की मजबूत नींव हैं।

BaLA कॉन्सेप्ट से बदलेगा आंगनबाड़ी का स्वरूप

सरकार ने भवन निर्माण में BaLA यानी Building as Learning Aid कॉन्सेप्ट को अपनाने पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि आंगनबाड़ी भवन खुद बच्चों के सीखने का माध्यम बनें। इन केंद्रों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि बच्चे खेल-खेल में सीख सकें और वातावरण उन्हें मानसिक विकास के लिए प्रेरित करे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भवन केवल ढांचा न हो, बल्कि पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के लिए आकर्षक और उपयोगी स्थान बने।

फंडिंग और निर्माण प्रक्रिया की रूपरेखा

प्रति आंगनबाड़ी भवन के निर्माण के लिए 11.69 लाख रुपये की राशि तय की गई है। इसमें अलग-अलग स्रोतों से फंडिंग की व्यवस्था की गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग से 2 लाख रुपये, महात्मा गांधी नरेगा योजना से 8 लाख रुपये और बाकी राशि डीएमएफ, सीएसआर या अन्य स्थानीय संसाधनों से जुटाई जाएगी। इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और निर्माण कार्य को तेज गति देना है।

2027 तक पूरा करने का लक्ष्य और सख्त मॉनिटरिंग

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए और प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। सरकार ने मार्च 2027 तक सभी निर्माण कार्य पूरे करने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा के जरिए काम की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया गया है कि विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसका असर सीधे तौर पर बस्तर जैसे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर पड़ेगा।

 

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