छत्तीसगढ़ में CGPSC और D.El.Ed परीक्षा की तारीख टकराने से हजारों छात्र परेशान हैं। अभ्यर्थियों ने परीक्षा तिथि बदलने की मांग करते हुए शासन से जल्द फैसला लेने की अपील की है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। CGPSC मुख्य परीक्षा और D.El.Ed सेकंड ईयर की परीक्षा एक ही दिन पड़ने से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। माध्यमिक शिक्षा मंडल के टाइम टेबल के मुताबिक D.El.Ed द्वितीय वर्ष की परीक्षा 8 जून 2026 को होगी। वहीं CGPSC की मुख्य परीक्षा 6 जून से 9 जून तक आयोजित की जाएगी। ऐसे में कई छात्रों को मजबूरी में किसी एक परीक्षा को छोड़ना पड़ सकता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि दोनों परीक्षाएं उनके करियर से सीधे जुड़ी हैं। एक तरफ सरकारी नौकरी का सपना है, तो दूसरी तरफ शिक्षक भर्ती में शामिल होने की पात्रता दांव पर लगी हुई है।
एक तारीख ने बढ़ाई हजारों छात्रों की टेंशन
छत्तीसगढ़ पीएससी (CGPSC) मुख्य परीक्षा को राज्य की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में माना जाता है। इसके लिए छात्र सालों तक तैयारी करते हैं। दूसरी तरफ D.El.Ed परीक्षा पास करना भविष्य की शिक्षक भर्ती के लिए जरूरी शर्त है। अब दोनों परीक्षाओं की तारीख टकराने से छात्रों के सामने बड़ा असमंजस खड़ा हो गया है। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने दोनों परीक्षाओं के लिए आवेदन किया है और लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि एक परीक्षा चुनने का मतलब दूसरे करियर विकल्प को खतरे में डालना होगा।
शिक्षक भर्ती की पात्रता पर भी मंडराया खतरा
अभ्यर्थियों के मुताबिक अगर वे D.El.Ed की परीक्षा नहीं दे पाए, तो अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने में दिक्कत आ सकती है। यानी परीक्षा तिथि का यह टकराव सिर्फ एक दिन की समस्या नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला बन गया है। छात्रों का कहना है कि शासन और शिक्षा विभाग को ऐसी स्थिति से बचने के लिए पहले ही समन्वय करना चाहिए था।
छात्रों ने शासन से लगाई गुहार
परीक्षार्थियों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल और शिक्षा विभाग से परीक्षा तिथि बदलने की मांग की है। इस संबंध में आवेदन भी सौंपे गए हैं। हालांकि अब तक किसी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। छात्रों का कहना है कि समय तेजी से निकल रहा है और अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो हजारों अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद मिले मौके को वे सिर्फ प्रशासनिक समन्वय की कमी की वजह से गंवाना नहीं चाहते।
शिक्षा व्यवस्था पर उठने लगे सवाल
परीक्षा तिथियों के टकराव ने राज्य की परीक्षा प्रणाली और समन्वय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल होता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। खासकर तब, जब दोनों परीक्षाएं बड़ी संख्या में युवाओं के भविष्य से जुड़ी हों। अब छात्रों की नजर शासन के अगले फैसले पर टिकी है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।