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CBI Recreates Twisha Death Scene

ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। सोमवार को CBI की टीम सास गिरिबाला सिंह और प

ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने 80 किलो की डमी के साथ घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएट किया। सास और पति की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के बाद जांच नए मोड़ पर पहुंच गई है।


ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। सोमवार को cbi की टीम सास गिरिबाला सिंह और प

Bhopal News |

ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। सोमवार को CBI की टीम सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को लेकर घटनास्थल पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश की। जांच एजेंसी ने ट्विशा के वजन के बराबर करीब 80 किलो की डमी तैयार कर फंदे पर लटकाया। फिर उसे उतरवाकर घटनास्थल की परिस्थितियों का परीक्षण किया। इस दौरान कई अहम बिंदुओं का मिलान आरोपियों के बयानों से किया गया।

मामले में अब मेडिकल एंगल भी जांच के दायरे में आ गया है। CBI उस डॉक्टर से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है जिसने ट्विशा को गर्भपात की सलाह दी थी।

CBI ने ऐसे रीक्रिएट किया पूरा घटनाक्रम

घटनास्थल पर पहुंची टीम अपने साथ विशेष रूप से तैयार की गई डमी लेकर आई थी। डमी का वजन ट्विशा के बराबर रखने के लिए उसमें रेत भरी गई और पैरों में डंबल बांधे गए। करीब दो घंटे तक चली इस प्रक्रिया में जांचकर्ताओं ने फंदे की ऊंचाई, वजन के दबाव और शव उतारने की संभावित स्थिति का परीक्षण किया। मकसद यह समझना था कि घटनास्थल पर जो दावा किया गया है, वह परिस्थितियों से मिलता जुलता है या कहानी कुछ और ही है।

डॉक्टर से पूछताछ क्यों अहम

जांच में अब उस डॉक्टर की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिसने कथित तौर पर ट्विशा को अबॉर्शन की सलाह दी थी। CBI यह जानने की कोशिश करेगी कि मेडिकल परामर्श के दौरान क्या परिस्थितियां थीं और क्या इसका संबंध मामले की जांच से जुड़ता है। इससे ट्विशा की मानसिक और शारीरिक स्थिति को लेकर भी कुछ अहम जानकारी सामने आ सकती है।

आत्महत्या या हत्या की गुत्थी सुलझाने पर फोकस

इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि ट्विशा की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह थी। समर्थ सिंह लगातार आत्महत्या का दावा कर रहा है और गर्भपात के बाद डिप्रेशन को कारण बता रहा है। हालांकि जांच एजेंसी केवल बयानों पर निर्भर नहीं है। CBI फॉरेंसिक साक्ष्यों, घटनास्थल की परिस्थितियों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ रही है।

फरारी के दिनों का हिसाब तलाश रही एजेंसी

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि FIR दर्ज होने के बाद समर्थ सिंह तुरंत भोपाल से बाहर नहीं गया था। वह करीब तीन दिन तक शहर में ही रहा और बाद में जबलपुर पहुंचा। CBI अब यह पता लगा रही है कि इस दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था, कहां रुका और उसे किसने मदद पहुंचाई। जांच एजेंसी मोबाइल लोकेशन, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल चैट की भी पड़ताल कर रही है।

घटनास्थल से अस्पताल तक हर कड़ी की जांच

CBI यह भी खंगाल रही है कि ट्विशा को सबसे पहले किसने देखा था। फंदे से उतारने में कौन शामिल था और अस्पताल ले जाने तक क्या-क्या हुआ। जांचकर्ता इन सभी बयानों का इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों से मिलान कर रहे हैं। साथ ही मौत से पहले कथित मारपीट, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और घटनाक्रम की टाइमलाइन को भी बारीकी से जांचा जा रहा है। इसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और चार्जशीट की दिशा तय होगी।

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