ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने आरोपी पति समर्थ सिंह के साथ क्राइम सीन रिक्रिएट किया। हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा है।
भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। CBI ने आरोपी पति समर्थ सिंह को लेकर घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट किया, जबकि हाईकोर्ट ने सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया। 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा की संदिग्ध मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, लेकिन मायके वालों का आरोप है कि यह योजनाबद्ध हत्या का मामला है।
मामले में अब डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और कथित मानसिक प्रताड़ना जांच के केंद्र में आ गए हैं। इसी वजह से केस ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा ध्यान खींचा है।
CBI ने समर्थ को घर ले जाकर कराया सीन रिक्रिएशन
बुधवार को SIT ने आरोपी समर्थ सिंह को भोपाल कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे 29 मई तक CBI रिमांड पर भेज दिया। इसके बाद जांच एजेंसी समर्थ को सीधे उसके घर लेकर पहुंची, जहां ट्विशा की मौत हुई थी। CBI टीम ने घर के भीतर पूरे घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश की। अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि घटना वाली रात घर के अंदर क्या हुआ था और घटनास्थल की परिस्थितियां क्या थीं। जांच एजेंसी अब फोरेंसिक एंगल और घटनास्थल की तकनीकी जांच को पहले से ज्यादा गंभीरता से देख रही है।
हाईकोर्ट में सास की जमानत पर तीखी बहस
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में रिटायर्ड जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को लेकर लंबी सुनवाई हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत में कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में सहयोग नहीं किया और जमानत की शर्तों का “बर्बर तरीके” से उल्लंघन हुआ। उन्होंने दावा किया कि नोटिस लेने तक से इनकार किया गया और बाद में व्हाट्सएप के जरिए नोटिस भेजने पड़े। वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि FIR में लगे आरोप अपने आप में सबूत नहीं होते। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि ट्विशा की चैट्स में ज्यादातर शिकायतें पति के खिलाफ थीं, सास के खिलाफ सीधे आरोप नहीं थे।
डिजिटल सबूतों पर टिकी पूरी जांच
मामले की जांच अब मोबाइल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डेटा पर केंद्रित हो गई है। SIT ने कोर्ट को बताया कि 12 से 20 मई तक की कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन सुरक्षित रखने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को पत्र भेजे गए हैं। ट्विशा के परिवार का आरोप है कि मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने कई प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों को फोन किए थे। इसी दावे के बाद CDR जांच को अहम माना जा रहा है। CBI ने SIT से पूरी केस डायरी भी मांगी थी। शुरुआती जांच में दस्तावेज अधूरे पाए जाने पर एजेंसी ने अतिरिक्त जानकारी जोड़ने के निर्देश दिए थे।
समर्थ ने रिश्ते में तनाव और मानसिक इलाज का किया जिक्र
पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह ने माना कि शादी के बाद रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि उसने किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा से इनकार किया। समर्थ ने दावा किया कि ट्विशा मानसिक तनाव से गुजर रही थीं और उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर था। उसने कहा कि नींद की दवाएं डॉक्टर की सलाह पर दी जा रही थीं। दूसरी तरफ ट्विशा के परिवार का आरोप है कि गर्भावस्था को लेकर विवाद के बाद उन पर मानसिक दबाव बढ़ा और इलाज शुरू कराया गया। परिवार ने यह भी दावा किया कि कुछ महीनों में ट्विशा का वजन तेजी से कम हुआ था। अब CBI यह जांच कर रही है कि मानसिक इलाज वास्तव में जरूरी था या नहीं, क्या ट्विशा की सहमति ली गई थी और क्या उनके परिवार को पूरी जानकारी दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने बढ़ाई संवेदनशीलता
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर चुका है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि मीडिया ट्रायल से बचना चाहिए और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने देना चाहिए। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं। वहीं बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया।
अब पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि डिजिटल सबूत, फोरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर CBI किस निष्कर्ष तक पहुंचती है। फिलहाल यह केस सिर्फ एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि प्रभावशाली परिवार, जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के बीच भरोसे की परीक्षा बनता जा रहा है।