भोपाल की पुलिस प्रशिक्षण शाला भौंरी में 521 नवआरक्षकों की दीक्षांत परेड आयोजित हुई। इनमें 322 महिला आरक्षक शामिल रहीं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को सम्मानित भी किया गया।
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भोपाल के अधीन पुलिस प्रशिक्षण शाला भौंरी में बुधवार को चतुर्थ नव आरक्षक बैच का दीक्षांत परेड समारोह आयोजित किया गया। समारोह में 521 नवआरक्षक प्रशिक्षण पूरा कर औपचारिक रूप से पुलिस विभाग का हिस्सा बने। इस बैच की खास बात महिला ट्रेनीज की बड़ी भागीदारी रही। कुल 521 प्रशिक्षुओं में 322 महिला और 199 पुरुष नवआरक्षक शामिल रहे। दीक्षांत परेड में सभी प्रशिक्षुओं ने राष्ट्रीय ध्वज और संविधान को साक्षी मानकर सेवा की शपथ ली।
समारोह में भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम पुलिस अकादमी के उपनिदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
एक साल तक चला आधुनिक पुलिसिंग का प्रशिक्षण
इस बैच का प्रशिक्षण 30 जून 2025 से शुरू हुआ था। इसका आज यानी 20 मई 2026 के दिन दीक्षांत परेड के साथ पूरा हुआ। प्रशिक्षण के दौरान नवआरक्षकों को सिर्फ पारंपरिक पुलिसिंग ही नहीं, बल्कि आधुनिक अपराधों से निपटने की भी तैयारी कराई गई। प्रशिक्षुओं को साइबर अपराध, कानून व्यवस्था, सामुदायिक पुलिसिंग और थाना प्रबंधन जैसे विषयों पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा बाह्य प्रशिक्षण में शारीरिक दक्षता, आर्म्स ट्रेनिंग, यूएसी, योग और हार्टफुलनेस पर भी विशेष फोकस रखा गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदलते अपराध और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए नए बैच को आधुनिक पुलिसिंग मॉडल के अनुसार तैयार किया गया है।
श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु सम्मानित
दीक्षांत समारोह के दौरान अलग-अलग श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को सम्मानित भी किया गया। सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का पुरस्कार नवआरक्षक रामनिवास मिश्रा को मिला। बाह्य प्रशिक्षण में मनीष राठौर को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया, जबकि आंतरिक प्रशिक्षण में महिला नवआरक्षक माधुरी ने पहला स्थान हासिल किया। इन पुरस्कारों को लेकर प्रशिक्षुओं और उनके परिजनों में खास उत्साह देखने को मिला।
‘पुलिस वर्दी सिर्फ व्यक्ति नहीं, पूरे विभाग का प्रतिनिधित्व करती है’
मुख्य अतिथि संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि Passing Out Parade हर पुलिसकर्मी के जीवन का सबसे अहम क्षण होता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जवान सीधे फील्ड की जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग से आम लोगों की अपेक्षाएं सबसे ज्यादा होती हैं और मुश्किल परिस्थितियों में पीड़ित व्यक्ति पुलिस को ही उम्मीद के रूप में देखता है। उन्होंने नवआरक्षकों से कहा कि वर्दी केवल व्यक्ति की पहचान नहीं होती, बल्कि पूरे पुलिस विभाग की छवि उसी से बनती है। इसलिए व्यवहार, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सबसे अहम हैं।

समारोह में पुलिस के सीनियर अधिकारी भी पहुंचे
दीक्षांत परेड में पुलिस मुख्यालय और प्रशिक्षण विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक प्रशासन रूचिवर्धन मिश्र, डीआईजी विनीत कपूर, डीआईजी प्रशिक्षण मनीष अग्रवाल समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा प्रशिक्षुओं के परिजन भी समारोह में बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में उपनिदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने आयोजन से जुड़े स्टाफ को शुभकामनाएं दीं।