सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में संचालित 25 हजार अवैध व्यावसायिक संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राजधानी भोपाल में नगर निगम सीमा के भीतर आवासीय क्षेत्रों में बिना अनुमति संचालित दुकानों, गोदामों, शोरूम, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम ने ऐसे संस्थानों की पहचान के लिए सर्वे प्रारंभ कर दिया है। प्रारंभिक सर्वे में लगभग 25 हजार अवैध रूप से संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी सामने आई है।खास बात यह है कि हाल ही में हुई जनगणना के दौरान भी कई आवासीय भवनों में दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी मिली है, जिससे नगर निगम को सर्वेक्षण में काफी सहायता मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी सीमा के भीतर आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कर कार्रवाई करें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लैंड यूज नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को सील करने या हटाने जैसी प्रभावी कार्रवाई भी करनी होगी।अदालत का मानना है कि रिहायशी क्षेत्रों का व्यावसायिक उपयोग नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है।
केवल कुछ पेशों को ही है अनुमति
नगरीय निकायों के नियमों के अनुसार आवासीय परिसरों में केवल कुछ निर्धारित पेशेवरों जैसे डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), आर्किटेक्ट और सीमित स्तर पर चिकित्सा सेवाओं को संचालन की अनुमति है।नियमों के तहत ऐसे पेशेवर अपने आवासीय परिसर के कुल क्षेत्रफल के अधिकतम 25 प्रतिशत हिस्से का उपयोग पेशेगत कार्यों के लिए कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की दुकान, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल, लाइब्रेरी, गोदाम या अन्य व्यावसायिक गतिविधि अवैध मानी जाएगी।आवासीय भूखंड का उपयोग किराये पर पार्किंग के लिए देना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
इन क्षेत्रों में मिले सबसे अधिक मामले
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार भोपाल में लैंड यूज उल्लंघन के सर्वाधिक मामले आवासीय कॉलोनियों में सामने आए हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में होटल, सुपर बाजार, कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलेआम संचालित होते पाए गए हैं।
जनगणना रिपोर्ट भी बनेगी आधार
नगर निगम के अनुसार मकानों की जनगणना के दौरान प्राप्त आंकड़ों में कई आवासीय भवनों में दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी मिली है। इन आंकड़ों को भी सर्वे का आधार बनाया जा रहा है।अधिकारियों का कहना है कि जनगणना से प्राप्त जानकारी और मौजूदा सर्वे रिपोर्ट को मिलाकर अंतिम सूची तैयार की जाएगी।
अदालत में पेश करनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि अवैध व्यावसायिक कब्जों और लैंड यूज परिवर्तन के मामलों में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।इसी के तहत भोपाल नगर निगम सहित प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों ने भी अवैध प्रतिष्ठानों की पहचान के लिए सर्वे अभियान शुरू कर दिया है।
महापौर बोलीं- जल्द शुरू होगी कार्रवाई
भोपाल की महापौर मालती राय ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आवासीय कॉलोनियों में बिना अनुमति संचालित व्यावसायिक संस्थानों को प्रतिबंधित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा सर्वे कराया जा रहा है। जनगणना में भी कई आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी मिली है। सर्वे पूरा होने के बाद चिन्हित संस्थानों की सूची को अंतिम रूप देकर जप्ती और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाएगी।नगर निगम का कहना है कि सर्वे अभी जारी है और आने वाले दिनों में चिन्हित संस्थानों की संख्या और बढ़ सकती है।