भोपाल में हजारों निजी कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं, छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठता है।
नगर निगम के पास नहीं है पूरा रिकॉर्ड, आवासीय इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे संस्थान
राजधानी भोपाल में हजारों छात्र जिस कोचिंग सेंटर और निजी लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से बड़ी संख्या बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही है। नगर निगम और जिला प्रशासन के पास इन संस्थानों का न तो सटीक रिकॉर्ड है और न ही इनके खिलाफ अब तक कोई व्यापक कार्रवाई की गई है।जानकारी के अनुसार शहर में करीब 5 हजार से अधिक निजी लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश आवासीय इलाकों में चल रहे हैं, जहां अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास, सीसीटीवी और अन्य बुनियादी सुरक्षा इंतजाम तक नहीं हैं।
छात्रों की मजबूरी बना कारोबार
हर वर्ष मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 20 हजार छात्र पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भोपाल आते हैं। किराए के कमरों में रहने वाले इन छात्रों को पढ़ाई के लिए शांत वातावरण नहीं मिल पाता, जिसके चलते वे निजी लाइब्रेरी और स्टडी सेंटर का सहारा लेते हैं।इसी जरूरत को व्यवसाय में बदलते हुए कई मकान मालिकों ने अपने आवासीय भवनों को लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर में तब्दील कर दिया है। इनमें से अधिकांश संस्थान नगर निगम की अनुमति, ट्रेड लाइसेंस और फायर एनओसी के बिना संचालित हो रहे हैं।
अशोका गार्डन से कोलार तक फैला नेटवर्क
एमपी नगर, अशोका गार्डन, पिपलानी, शाहपुरा, कोलार, अवधपुरी, कस्तूरबा नगर और भेल क्षेत्र में सबसे अधिक निजी लाइब्रेरी और स्टडी सेंटर संचालित हो रहे हैं।अनुमान है कि केवल इन क्षेत्रों में ही 2,000 से 2,500 से अधिक लाइब्रेरियां बिना अनुमति चल रही हैं। कई भवनों में छोटे-छोटे पार्टिशन बनाकर छात्रों को पढ़ाई के लिए किराए पर स्थान दिया जा रहा है।
6×6 के केबिन, सुरक्षा व्यवस्था शून्य
कई निजी लाइब्रेरियों में बड़े हॉल को छोटे-छोटे केबिन में विभाजित कर दिया गया है। छात्रों को केवल एक कुर्सी और टेबल उपलब्ध कराई जाती है। अधिकांश जगहों पर सीसीटीवी कैमरे, फायर फाइटिंग सिस्टम और आपातकालीन निकास जैसी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।
रीवा जिले के मऊगंज निवासी छात्र साकेत ने बताया कि वह अशोका गार्डन स्थित एक लाइब्रेरी में 2 हजार रुपए प्रतिमाह देकर एक पार्टिशन केबिन किराए पर लेकर पढ़ाई करता है। भवन में एक बड़े हॉल को 10 हिस्सों में बांटकर अलग-अलग छात्रों को समय के हिसाब से किराए पर दिया जाता है।
नगर निगम के रिकॉर्ड में सिर्फ 100 कोचिंग
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार उनके रिकॉर्ड में शहर के लगभग 100 प्रमुख कोचिंग संस्थान और 40 से अधिक सेल्फ-स्टडी सेंटर या पुस्तकालय ही दर्ज हैं।जबकि प्रशासनिक नियमों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए ट्रेड लाइसेंस, फायर एनओसी और ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कोरोना काल के बाद निजी लाइब्रेरियों और कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
बेसमेंट में चल रहे 1500 से अधिक कोचिंग सेंटर
एक सर्वे के अनुसार भोपाल में करीब 1500 छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान ऐसे हैं जो बेसमेंट, मल्टीस्टोरी इमारतों या छोटे कमरों में संचालित हो रहे हैं।दिल्ली के कोचिंग हादसे के बाद कुछ समय तक निरीक्षण और नोटिस की कार्रवाई हुई, लेकिन उसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। वर्तमान में भी बड़ी संख्या में संस्थान बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए संचालित हो रहे हैं।
निगम आयुक्त ने दिए सर्वे के निर्देश
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा है कि शहर में बिना अनुमति संचालित कोचिंग, लाइब्रेरी और अन्य व्यावसायिक संस्थानों की जानकारी मिली है। इसके लिए गोपनीय सर्वे शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि जो संस्थान निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवासीय क्षेत्रों में चल रहे अवैध व्यावसायिक संस्थानों पर कार्रवाई के निर्देशों का भी पालन किया जाएगा।
तथ्य एक नजर में
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श्रेणी
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अनुमानित संख्या
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अवैध लाइब्रेरियां
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2,000-2,500+
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अवैध कोचिंग सेंटर
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1,500+
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कुल अवैध संस्थान
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5,000+
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निगम रिकॉर्ड में कोचिंग
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लगभग 100
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निगम रिकॉर्ड में लाइब्रेरियां
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40+
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भोपाल आने वाले छात्र (प्रतिवर्ष)
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लगभग 20,000
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