दो पैन कार्ड मामले में सपा नेता आजम खां की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनकी सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी, जबकि बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा बरकरार रखी गई।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Azam Khan और उनके बेटे Abdullah Azam Khan से जुड़े चर्चित दो पैन कार्ड मामले में शनिवार को बड़ा फैसला आया। रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए आजम खां की सजा सात साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी है। हालांकि अब्दुल्ला आजम को इस मामले में आंशिक राहत मिली है। अदालत ने उनकी सात साल की सजा बरकरार रखी, लेकिन जुर्माने की राशि में बड़ा इजाफा किया गया। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
कोर्ट ने क्यों बढ़ाई आजम खां की सजा?
एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए आजम खां की सजा और जुर्माना दोनों बढ़ा दिए। पहले उन्हें सात साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा मिली थी। अब अदालत ने जुर्माना बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया है।
दरअसल, यह मामला दो अलग-अलग पैन कार्ड रखने से जुड़ा है। नवंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आजम खां और अब्दुल्ला आजम दोनों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद बचाव पक्ष ने फैसले को चुनौती दी थी, जबकि सरकार ने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए ऊपरी अदालत में अपील दायर की थी। शनिवार को इसी अपील पर फैसला सुनाया गया।
अब्दुल्ला आजम को क्या राहत मिली?
अदालत ने Abdullah Azam Khan की जेल की सजा में कोई बढ़ोतरी नहीं की। उनकी सात साल की सजा बरकरार रखी गई है। हालांकि कोर्ट ने उन पर लगाया गया जुर्माना 50 हजार रुपये से बढ़ाकर चार लाख रुपये कर दिया यानी सजा तो जस की तस रही, लेकिन आर्थिक दंड काफी बढ़ गया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अदालत का यह फैसला आने वाले समय में आजम परिवार की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ा सकता है।
पहले भी बढ़ चुकी हैं मुश्किलें
गौरतलब है कि हाल ही में Azam Khan को एक अन्य मामले में भी सजा सुनाई गई थी। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर के तत्कालीन डीएम को लेकर विवादित बयान देने के मामले में अदालत ने उन्हें दो साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी थी। उस मामले में आरोप था कि रोड शो के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद चुनाव आयोग ने रिपोर्ट तलब की थी और बाद में केस दर्ज हुआ था।
फिलहाल आजम खां और उनके बेटे नवंबर 2025 से जेल में हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा?