बिलासपुर के छतौना गांव में तालाब की खुदाई के दौरान प्राचीन स्नानागार, घाट और कुंड जैसी संरचनाएं मिली हैं। खोज के बाद इलाके में उत्साह बढ़ गया है और संरक्षण की मांग उठ रही है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में तालाब की खुदाई के दौरान ऐसी खोज हुई जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। तखतपुर क्षेत्र के छतौना गांव में जूनी तालाब की सफाई और गहरीकरण के बीच प्राचीन स्नानागार जैसी संरचना सामने आई है। खुदाई के दौरान मजदूरों को पहले पत्थरों से बनी दीवारें दिखाई दीं। इसके बाद धीरे-धीरे विशाल सीढ़ीनुमा घाट, पचरी और कुंड जैसी संरचनाएं बाहर आने लगीं। इस खोज के बाद गांव में लोगों की भीड़ जुटने लगी है। कई ग्रामीण इसे ऐतिहासिक धरोहर तो कुछ दैवीय संकेत मान रहे हैं।
खुदाई में सामने आया भव्य घाट और कुंड
ग्रामीणों के मुताबिक तालाब के भीतर मिली पचरी करीब 40 फीट लंबी और 15 फीट चौड़ी बताई जा रही है। इसके नीचे कुंडनुमा ढांचा भी दिखाई दे रहा है। जिसने लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी व्यवस्थित और मजबूत संरचना देखकर लगता है कि यह किसी पुराने राजवंश या प्राचीन सभ्यता से जुड़ी हो सकती है। खुदाई के बाद पूरे क्षेत्र में यह चर्चा तेजी से फैल गई और आसपास के गांवों से लोग इस स्थल को देखने पहुंचने लगे।
ग्रामीण बोले- कभी अंदाजा नहीं था
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं था कि तालाब के नीचे इस तरह की कोई ऐतिहासिक संरचना छिपी हो सकती है। कई ग्रामीण इसे ईश्वरीय कृपा और चमत्कार मान रहे हैं। वहीं इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोग इसे बिलासपुर की नई ऐतिहासिक खोज के तौर पर देख रहे हैं। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण गांव में मेला जैसा माहौल बन गया है।
संरक्षण की मांग तेज
खोज सामने आने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस स्थल की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पुरातत्व विभाग की टीम जल्द मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक जांच करे। ग्रामीण चाहते हैं कि यदि यह संरचना ऐतिहासिक साबित होती है तो इसे संरक्षित घोषित किया जाए, ताकि भविष्य में यह धरोहर सुरक्षित रह सके। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल आने वाले समय में पर्यटन और इतिहास अध्ययन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
बिलासपुर पहले भी दे चुका है कई ऐतिहासिक संकेत
बिलासपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पहले भी खुदाई और निर्माण कार्यों के दौरान प्राचीन मूर्तियां, सिक्के, शिलालेख और ताम्रपत्र मिल चुके हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि छतौना में मिली संरचना भी किसी पुराने कालखंड से जुड़ी हो सकती है। फिलहाल प्रशासन ने पुरातत्व विभाग को जानकारी भेज दी है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अगर जांच में यह संरचना ऐतिहासिक साबित होती है, तो यह खोज छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक नई कड़ी जोड़ सकती है।