अंबिकापुर में क्रशर कारोबार के घाटे के बाद आरोपी ने फर्जी स्कीम बनाकर 10 लोगों से करीब 3 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने मास्टरमाइंड शिवशंकर दास को गिरफ्तार कर लिया है।
अंबिकापुर। छ्त्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक बड़े ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यहां क्रशर कारोबार में हुए नुकसान को भरने के लिए एक आरोपी ने फर्जी लोन स्कीम बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाया। इस पूरे मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड शिवशंकर दास को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने खुद को एक फाउंडेशन ग्रुप का संचालक बताकर आसान लोन और खास स्कीम का लालच दिया। इसी बहाने उसने कई लोगों से बड़ी रकम ऐंठ ली। पुलिस के अनुसार इस धोखाधड़ी में एक शिक्षिका समेत कुल 10 लोग शिकार बने और करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हुई।
लोन दिलाने के नाम पर बनाया गया भरोसे का जाल
मामले की शिकायत दिव्या एक्का नाम की शिक्षिका ने गांधीनगर थाने में दर्ज कराई थी। वह राजपुर ब्लॉक में पढ़ाती हैं और घर निर्माण के लिए लोन की तलाश में थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात आरोपी और उसके साथियों से हुई। उन्होंने खुद को बैंक से जुड़े प्रभावशाली संपर्क वाला बताया। पीड़िता को भरोसा दिलाया गया कि विशेष स्कीम के तहत आसान लोन दिलाया जाएगा। इसमें कुछ प्रतिशत राशि कंपनी को देनी होगी और बाकी लाभार्थी को सुविधाजनक तरीके से मिलेगा। इसी भरोसे के आधार पर पीड़िता से कई दस्तावेज हासिल कर लिए गए और फर्जी तरीके से लोन प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
तीन बैंकों से 41 लाख का लोन, 28 लाख की हेराफेरी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने पीड़िता के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक से कुल 41.08 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया। इसके बाद अलग-अलग खातों में करीब 28 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। यह पूरी प्रक्रिया व्हाट्सएप के जरिए दस्तावेज मंगवाकर की गई, जिससे पीड़िता को शुरू में किसी तरह की धोखाधड़ी का अंदेशा नहीं हुआ।
क्रशर कारोबार में नुकसान से शुरू हुई ठगी की साजिश
पूछताछ में आरोपी शिवशंकर दास ने स्वीकार किया कि वह किराए पर क्रशर चलाता था और उसमें भारी नुकसान होने के बाद आर्थिक संकट में आ गया था। इसी दबाव में उसने फर्जी स्कीम बनाकर लोगों को लोन के नाम पर झांसे में लेना शुरू किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने केवल एक नहीं बल्कि कई लोगों को इसी तरह निशाना बनाया।
9 और लोगों को शिकार बनाकर 2.5 करोड़ की ठगी
जांच में यह भी सामने आया है कि पीड़िता दिव्या एक्का के अलावा सरगुजा क्षेत्र के नौ अन्य लोग भी इसी तरह ठगी का शिकार हुए हैं। कुल मिलाकर यह रकम ढाई से तीन करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और जुड़े खातों की गहन जांच कर रही है ताकि बाकी सहयोगियों की पहचान की जा सके।
डिजिटल दस्तावेज से बढ़ी धोखाधड़ी की गंभीरता
इस मामले में सबसे अहम पहलू यह सामने आया कि आरोपी ने पैन कार्ड, आधार, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप जैसे संवेदनशील दस्तावेज व्हाट्सएप के जरिए हासिल किए। इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक लोन प्रक्रिया पूरी कराई गई। इससे यह मामला डिजिटल फ्रॉड के नए तरीके की ओर इशारा करता है। पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की ठगी से बचने के लिए लोगों को अनजान स्कीम और लोन ऑफर्स से सतर्क रहने की जरूरत है।