एम्स भोपाल ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए डिजिटल सिस्टम शुरू किया है, जिससे 48 घंटे में घर बैठे ऑनलाइन प्रमाण पत्र मिल सकेंगे।
एम्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के लोगों को अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। एम्स के मरीजों और उनके परिजनों को भोपाल आने की जरूरत नहीं होगी। ये प्रमाण पत्र घर बैठे ही मिल सकेंगे। इसके लिए भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने ऑनलाइन सिस्टम विकसित किया है। यहां के मरीजों और उनके परिजनों को जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की डिजिटल सुविधा मिलेगी।
प्रक्रिया पूरी तरह डिजीटल
एम्स के निदेशक डॉ. माधवानंद ने बताया कि मरीजों और उनके परिजनों को राहत देते हुए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। इससे आवेदन देने, सत्यापन कराने और बार-बार काउंटर के चक्कर लगाने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
कैसे काम करेगा सिस्टम
उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह सिस्टम शुरू किया गया है। नर्सिंग टीम और ड्यूटी डॉक्टर ऑनलाइन मॉड्यूल में माता-पिता की पहचान, आधार, मोबाइल नंबर और जन्म या मृत्यु का समय तुरंत दर्ज करेंगे। मेडिकल रिकॉर्ड विभाग द्वारा डेटा के सत्यापन के बाद डिजिटल कॉपी पोर्टल पर अपलोड कर दी जाएगी। यह सिस्टम विकसित करने में एम्स ने आईआईटी इंदौर की मदद ली है।
एम्स ने दिया दंत स्वास्थ्य पर जागरूकता का संदेश
भोपाल। एम्स भोपाल में विश्व मौखिक (मुख) स्वास्थ्य दिवस पर दंत स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित ब्रशिंग, संतुलित आहार और समय-समय पर जांच से दंत रोगों की रोकथाम संभव है। कार्यक्रम में आम लोगों को दांतों और मसूड़ों की बीमारियों के लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। परामर्श और जांच के माध्यम से लोगों को बेहतर मौखिक स्वास्थ्य अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक करना है।