भोपाल समेत मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड संशोधन और एरियर की मांग को लेकर आंदोलन तेज किया। सोमवार से ओपीडी बंद करने की चेतावनी।
भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज हो गया है। स्टाइपेंड संशोधन और बकाया एरियर की मांग को लेकर डॉक्टरों ने शनिवार को काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो सोमवार से ओपीडी और रूटीन ऑपरेशन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
गांधी मेडिकल कॉलेज से शुरू हुआ विरोध
राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) समेत प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में शनिवार को जूनियर डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी वजह से डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सोमवार से ओपीडी बंद करने की चेतावनी
जूडा ने साफ कहा है कि अगर जल्द स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान पर निर्णय नहीं लिया गया तो सोमवार से डॉक्टर ओपीडी और रूटीन ऑपरेशन सेवाओं का बहिष्कार करेंगे। ऐसी स्थिति में प्रदेश के करीब आठ हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न काम बंद कर सकते हैं। इसका असर सीधे मरीजों की सामान्य चिकित्सा सेवाओं पर पड़ सकता है।
स्टाइपेंड संशोधन लागू नहीं होने से नाराजगी
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि शासन ने 7 जून 2021 को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। लेकिन लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी यह संशोधन लागू नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, अप्रैल 2025 से मिलने वाला एरियर भी अभी तक नहीं दिया गया। इसी देरी के कारण रेजिडेंट डॉक्टरों में असंतोष बढ़ गया है और अब वे आंदोलन के रास्ते पर उतर आए हैं।
रविवार को निकलेगा जस्टिस मार्च
आंदोलन के अगले चरण में रविवार को भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर में जस्टिस मार्च निकाला जाएगा। इसके अलावा दतिया, ग्वालियर, जबलपुर और प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी जूनियर डॉक्टर मार्च निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाएंगे।
मरीजों पर पड़ सकता है असर
अगर सोमवार से ओपीडी और इलेक्टिव सेवाएं बंद होती हैं तो मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। हर्निया जैसी सामान्य सर्जरी और अन्य रूटीन ऑपरेशन प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि डॉक्टरों ने साफ किया है कि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो।