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धारकुंडी के परमहंस सच्चिदानंद महाराज ब्रह्मलीन, अंतिम विदाई देने आश्रम पहुंचेंगे CM मोहन

धारकुंडी के परमहंस सच्चिदानंद महाराज ब्रह्मलीन, अंतिम विदाई देने आश्रम पहुंचेंगे CM मोहन

परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन के लिए सीएम मोहन यादव आज धारकुंडी आश्रम जाएंगे, सोमवार को समाधि होगी।

धारकुंडी के परमहंस सच्चिदानंद महाराज ब्रह्मलीन अंतिम विदाई देने आश्रम पहुंचेंगे cm मोहन

सतना। विंध्य क्षेत्र के प्रसिद्ध संत और धारकुंडी आश्रम के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज का 102 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके ब्रह्मलीन होने से पूरे विंध्य अंचल में शोक की लहर फैल गई है। उनकी पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए सतना जिले के धारकुंडी आश्रम में रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सोमवार को उन्हें आश्रम परिसर में ही समाधि दी जाएगी।

परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को दोपहर 3:40 बजे धारकुंडी आश्रम पहुंचेंगे। इससे पहले डिप्टी मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल आश्रम पहुंचकर संत के दर्शन कर चुके हैं।

22 साल की  उम्र में धारण किया था बैराग्य

परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने मात्र 22 वर्ष की आयु में वैराग्य धारण कर सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण, आध्यात्मिक साधना और समाज को दिशा देने में समर्पित किया। उन्होंने ‘मानस बोध’ और ‘गीता बोध’ जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। उनके प्रवचनों और विचारों पर आधारित कई पुस्तकों का प्रकाशन भी आश्रम द्वारा किया गया, जो आज भी साधकों और जिज्ञासुओं का मार्गदर्शन कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार, संत ने अपने जीवनकाल में ही समाधि स्थल का चयन कर लिया था। उनकी पार्थिव काया को धारकुंडी आश्रम के गर्भगृह में समाधि दी जाएगी। उनके गुरु भाई, चुनार के सक्तेशगढ़ आश्रम के संत स्वामी अडग़ड़ानंद महाराज शनिवार शाम को ही आश्रम पहुंच गए थे। इसके अलावा श्री श्री 1008 रामायण महाराज, वीरेन्द्र कुमार महाराज और विजय महाराज सहित कई संत मौजूद हैं।

आश्रम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए धारकुंडी आश्रम में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। करीब 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें जिला पुलिस बल, जबलपुर की छठी बटालियन, रीवा पीटीएस, जेएनपीए सागर और जबलपुर जिला पुलिस शामिल हैं। रीवा और सतना की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आश्रम से लगभग पांच किलोमीटर पहले धारकुंडी अस्पताल के पास वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

पूरे विंध्य क्षेत्र में शोक की लहर

परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज के निधन पर सांसद गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, नगर निगम परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंह तोमर और संजय पटारिया सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। विभिन्न संप्रदायों के संतों और अनुयायियों ने उन्हें आध्यात्मिक युगद्रष्टा बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

धारकुंडी आश्रम का आध्यात्मिक महत्व

धारकुंडी नाम ‘धार’ और ‘कुंडी’ शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ जलधारा और जलराशि होता है। घने जंगलों के बीच बहती यह पवित्र जलधारा वन्य जीवों और साधकों दोनों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। पांडवों के वनवास से जुड़ा यह क्षेत्र प्राचीन अघमर्षण तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। आज भी यहां राची-जप्तम के अवसर पर विशाल मेला लगता है और श्रद्धालु अघमर्षण कुंड में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। चित्रकूट की चौरासी कोस परिक्रमा में धारकुंडी श्री का विशेष महत्व है।

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