दूध से लेकर मिठाइयों तक भारी मिलावट हो रही है। इसको लेकर विभाग कार्रवाई में जुटा है लेकिन इसका कुछ खास डर या असर इस दुकान संचालकों पर नहीं पड़ रहा है।
Raebareli Exclusive: दूध से लेकर मिठाइयों तक हो रही भारी मिलावट, खानापूर्ति में जुटा विभाग |
रायबरेली: दूध से लेकर मिठाइयों तक भारी मिलावट हो रही है। इसको लेकर विभाग कार्रवाई में जुटा है लेकिन इसका कुछ खास डर या असर इस दुकान संचालकों पर नहीं पड़ रहा है। जबकि 80 प्रतिशत नमूने हर छमाही में फेल हो रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर बस खानापूरी ही की जा रही है। हाल ये है कि त्यौहार के पहले नमूने लेकर विभाग अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लेता है।
बीते छह महीने में 140 में से 111 नमूने फेल
जिले में दस हजार से ज्यादा मिठाई की दुकानें हैं जबकि रजिस्टर्ड 200 के करीब हैं। इनमें नाममात्र छापेमारी होती है। इसका दुकानदार फायदा उठाते हैं। इससे लोगों की सेहत के साथ जेब भी ढीली होती है। विभाग कार्रवाई का दावा कर रहा है। जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार जोरों पर है। खाद्य विभाग की कार्रवाई का कोई डर नहीं दिख रहा है। बाजार में मिलावटी दूध, पनीर और घी की बिक्री खुलेआम हो रही है। कलाकंद में असली दूध की जगह पाउडर का प्रयोग हो रहा है और व्यापारी अतिरिक्त मुनाफे के लालच में मिठाइयों की गुणवत्ता से खिलवाड़ कर रहे हैं।
मिलावटखोरों के हौसले बुलंद
काजू की मिठाई में काजू कम और मिलावटी खोवा ज्यादा डाला जा रहा है। मिठाई विक्रेता बर्फी में पिस्ता की जगह मूंगफली का इस्तेमाल कर रहे हैं। कालाजामुन में छेना की मात्रा कम करके मैदा ज्यादा मिलाया जा रहा है। लड्डू में चने के बेसन की जगह मटर का बेसन, चावल का आटा और सूजी का प्रयोग किया जा रहा है। खाद्य और औषधि विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई न होने से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं।
रंगों का धड़ल्ले इस्तेमाल
जिले में मिठाई, पनीर, आइसक्रीम और शीतल पेय पदार्थों में हानिकारक रंगों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। कई दुकानदार मिलावट छिपाने के लिए घुलनशील रंगों का प्रयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से पनीर में मिल्क पाउडर का मिश्रण और कुछ जगहों पर डिटर्जेंट तक का इस्तेमाल की सूचना है। चिकित्सकों के अनुसार, इन मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से किडनी और लीवर को नुकसान होने का खतरा है। साथ ही यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन पदार्थों में मिलाए जाने वाले रंग अतिसार का कारण बन सकते हैं और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
कंपनियां उठा रही जमकर फायदा
अब समय के साथ व्यक्ति पूरी तरह से बाजार पर निर्भर हो गया। कंपनियां इसका जमकर फायदा उठा रही हैं। वह बाजार में रेडीमेड तैयार की हुई खाद्य सामग्री खपा रही हैं। वहीं, इनकी आड़ में खाद्य सामग्रियों पर वस्तु निर्माण की तिथि, एक्सपायर तिथि इत्यादि तक अंकित नहीं होती है। ऐसें में खरीदार को पता ही नहीं चल पाता है कि खाद्य सामग्री का निर्माण कब हुआ। ऐसी खाद्य सामग्री लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रही है। अखाद्य रंग केमिकल से तैयार होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। अस्थमा, किडनी, लीवर, आंत और फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
खरीदारी करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब भी किसी दुकान पर सामान खरीदने जाएं तो देखें कि वह लाइसेंसी है या नहीं। ब्रांडेड या पैक्ड सामान ही खरीदें। पैक्ड सामान की लेबलिंग देखें कि वह मियाद निकली तो नहीं है। आइएसआइ मार्का देखकर ही सामान खरीदें, जो भारतीय मानक ब्यूरो (बीएसआइ) क्वालिटी व विश्वसनीयता के आधार पर कंपनी को देता है। यह मार्क फलों, सब्जियों, मसाले आदि पर दिया जाता है। एग मार्क लगी हुई चीजें गुणवत्ता व शुद्धता का प्रतीक होती हैं। यह खासतौर पर घी, तेल और मसालों पर होती है। किसी ब्रांडेड आइटम की गुणवत्ता या शुद्धता पर शक हो, तो आप उसके पैकेट पर छपे कंपनी के फोन नंबर या पते पर जाकर संपर्क कर सकते हैं। खरीदे गए सामान की रसीद जरूर लें।
इन में यह होती है मिलावट
दूध : पानी, यूरिया, डिटर्जेंट, अरारोट, रिफाइंड, स्टार्च।
खोया: सिंथेटिक दूध, पाउडर।
घी: वनस्पति, घी या मार्जरीन, आलू शकरकंद और दूसरे वसा।
सरसों का तेल: आर्जीमोन व सस्ता पाम आयल।
आइसक्रीम: वाशिंग पाउडर, स्क्मिड पाउडर व सेकरीन।
चीनी: चाक पाउडर।
शहद: पानी, चीनी का घोल।
लाल मिर्च: ईंट का बुरादा, सूडान (लाल) रंग, डंठल आदि।
हल्दी: मैटलिक पीला रंग।
गर्मी में सड़क किनारे बिक रहे खाद्य पदार्थों से खतरा
शहर के हर कार्नर पर गोलगप्पा, जूस, कटे फल, कुल्फी और चाट आदि की दुकानें लगी मिल जाएंगी। इनके विक्रेता कभी दस्ताने नहीं पहनते हैं। उनका पानी अक्सर घर से ही बना के लाते हैं । इनमें किसी तरह के मानक नहीं है। इससे ठीक तो गांव कस्बों की रसोई है। शहर के बाजार की बजाए कस्बे में अधिक भोजन सुरक्षित है।
क्या कहते है हमारे संवाददाता?
रायबरेली संवाददाता का कहना है कि किसी भी त्योहार के सीजन में मिठाई की खपत अधिक होती है। दूध की मात्रा नहीं बढ़ती है लेकिन खाद्य पदार्थ की सप्लाई अधिक हो जाती है। अधिक मुनाफे की चाहत में संचालक मिलावटी पनीर और खोया भारी मात्रा में मंगाना शुरू कर देते हैं। हालांकि अभियान चलाकर खाद्य और औषधि विभाग की ओर से छापेमारी करते हुए इन मिलावटी खाद्य पदार्थों की धर पकड़ की कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद अंदर के मार्गो से यह किसी तरह दुकान तक माल पंहुचाने में कामयाब हो जाते हैं। फिर यहां से यह आसानी से घरों तक पहुंच जाता है, और इन्हें ले जाने वाले लोग यह नहीं जान पाते हैं कि मीठे और नमकीन की जगह वे मीठा जहर खा रहे हैं। जो उनके शरीर में धीरे-धीरे जहर घोल रहा है।
क्या कहते है अधिकारी?
मानिक चंद्र सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य एवं सुरक्षा का कहना है कि विभाग लगातार इस पर काम कर रहा है। सैंपल की टेस्टिंग की जाती है। इसके साथ ही अनसेफ नमूने पर गंभीर कार्रवाई की जाती है। कई लोगों को जुर्माना भी किया गया है। जो भी शिकायत मिलती है उसपर भी कार्रवाई और निरीक्षण विभाग करता रहता है। कोई भी गलत करता पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।