एक्यूप्रेशर चिकित्सा में दवाओं का खर्च और लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है। इससे लोगों को राहत भी मिल रही है। यह कहना है एक्यूप्रेशर चिकित्सक डा भगवानदीन का जो...
Dr. Bhagwandin, Raebareli: डॉ भगवानदीन 15 साल से बिना दवा एक्यूप्रेशर से कर रहे मरीजों का इलाज |
Dr. Bhagwandin, Raebareli: एक्यूप्रेशर चिकित्सा में दवाओं का खर्च और लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है। इससे लोगों को राहत भी मिल रही है। यह कहना है एक्यूप्रेशर चिकित्सक डा भगवानदीन का जो रिफॉर्म क्लब में पिछले 15 साल से हाथ और पैर के बिंदुओं को दबाकर हजारों मरीजों को राहत दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि साल 2011 में रिफॉर्म क्लब के सचिव शंकरलाल गुप्ता ने उन्हें इस क्लब में बैठने का स्थान दिया था। तब से सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जारी है। डा भगवानदीन ने बताया कि इस नेचुरोपैथी चिकित्सा से वह गठिया, सर्वाइकल, स्लिपडिस्क, शुगर, बीपी, दमा, बवासीर, मिर्गी, साइटिका, मोटापा से लेकर खुजली-एक्जिमा तक का इलाज करते हैं। इससे हजारों लोगों को लाभ मिल चुका है। इसके लिए लोग दूर-दूर से इलाज के लिए आते हैं।
लगा चुके 100 से अधिक निशुल्क कैंप
डा भगवानदीन बताते हैं कि अब तक सौ से अधिक कैंप लग चुके हैं। 5000 से ज्यादा मरीज उपचार ले चुके हैं। यहां भी रोजाना 15-20 लोग आते हैं। शनिवार को अवकाश रखते हैं फिर भी इस दिन भी 8-10 मरीज पहुंच जाते हैं। जिनका इलाज वह करते हैं।
कोई फीस नहीं, केवल रजिस्ट्रेशन
सबसे खास बात फीस वह कोई फीड नहीं लेते हैं । यदि कैंप में मरीज मिल तो सिर्फ 50रुपये रजिस्ट्रेशन 15 दिन के लिए करते हैं। रिफॉर्म क्लब आने वाले मरीज को सौ रुपए रजिस्ट्रेशन का देना पड़ता है 200 रुपये में पूरा महीना इलाज करते हैं ।
दूर-दूर से आते हैं मरीज
उनके पास मध्य प्रदेश, प्रयागराज, दतिया, अमेठी, सुल्तानपुर, कानपुर, बाराबंकी, लखनऊ तक से मरीज यहां पहुंचते हैं। जिले के जिला जज और पुलिस के बड़े अधिकारी भी उनसे इलाज करा चुके हैं। क्लब सचिव शंकरलाल गुप्ता कहते हैं, डा. भगवानदीन की सेवा से गरीब और जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिली है।
क्या कहते हैं एक्यूप्रेशर चिकित्सक?
एक्यूप्रेशर चिकित्सक डा भगवानदीन का कहना है कि गठिया, सर्वाइकल, स्लिपडिस्क, शुगर, बीपी, दमा, बवासीर, मिर्गी, साइटिका, मोटापा से लेकर खुजली-एक्जिमा तक के मरीज आते हैं । उनके इलाज से उनको पूरा आराम मिल जाता है। इसीलिए अब मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दो से तीन माह में पूरा आराम मिल जाता है। इसके बाद कभी किसी दवा की जरूरत नहीं पड़ती है।