अमेरिका ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई के बाद तनाव और बढ़ा दिया है। ट्रम्प की सख्त चेतावनी, ईरान के जवाबी हमले और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने हालात को फिर गंभीर बना दिया है।
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिका की ओर से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि यदि ईरान अपने रवैये में बदलाव नहीं करता तो उसके अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। लगातार हो रहे हमलों और तीखी बयानबाजी ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अमेरिका ने फिर तेज की सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार नौसेना और वायुसेना ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। इन ठिकानों में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस और तटीय रडार सिस्टम शामिल थे। अमेरिका का कहना है कि यह ऑपरेशन 'एम/टी किकु' नामक तेल टैंकर पर हुए ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में किया गया। इससे पहले भी अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगभग एक घंटे तक हवाई हमले किए थे।
ट्रम्प की चेतावनी ने बढ़ाई कूटनीतिक हलचल
हमलों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर कड़ा संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब अनिश्चितकाल तक संयम नहीं बरत सकता। ट्रम्प के मुताबिक यदि सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ी तो उसके गंभीर परिणाम होंगे और ईरान के अस्तित्व पर भी असर पड़ सकता है। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
ईरान का जवाब और खाड़ी देशों की चिंता
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल किसी सैनिक के हताहत होने या बड़े सैन्य नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है, जबकि बहरीन पर हुए हमले की ओमान, कतर, यूएई और अन्य खाड़ी देशों ने निंदा की है।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे संवेदनशील इलाका
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर भी हमला हुआ, जिससे उसके कंट्रोल रूम को नुकसान पहुंचा। हालांकि चालक दल सुरक्षित बताया गया है और तेल रिसाव की सूचना नहीं है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, इसलिए यहां बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार दोनों पर असर डाल सकता है।
युद्धविराम और समझौते पर उठे नए सवाल
ईरान ने अमेरिकी हमलों को दोनों देशों के बीच हुए मेमोरेंडम (MoU) और युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। वहीं IRGC ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसी कार्रवाई जारी रही तो समझौते से जुड़ी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर इजराइल और लेबनान के बीच हुए नए सुरक्षा समझौते को लेकर भी क्षेत्रीय राजनीति में मतभेद सामने आए हैं। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने इसे हिजबुल्लाह के लिए लाभकारी करार दिया है।
राजनयिक गतिविधियां भी हुईं तेज
सैन्य तनाव के समानांतर कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बगदाद में इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा पर चर्चा की। पाकिस्तान और बहरीन के विदेश मंत्रियों के बीच भी बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्र में शांति और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस बीच ईरान ने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां भी तेज कर दी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।