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Trump Pushes Abraham Accords

ट्रम्प ने पाकिस्तान समेत मुस्लिम देशों से कहा- इजराइल से दोस्ती करो, मीटिंग में छा गई खामोशी

डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की अपील की। अब्राहम अकॉर्ड्स को लेकर हुई मीटिंग में कई देशों की चुप्पी चर्चा में रही।


ट्रम्प ने पाकिस्तान समेत मुस्लिम देशों से कहा- इजराइल से दोस्ती करो मीटिंग में छा गई खामोशी

Trump Appeal To Muslims Countries |

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा दांव चल दिया है। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्किये समेत कई मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सुधारने की अपील की है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने कई मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ वर्चुअल मीटिंग की और उनसे अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने को कहा। यह वही समझौता है जिसके तहत कुछ अरब देशों ने इजराइल के साथ आधिकारिक संबंध बनाए थे। हालांकि बैठक के दौरान कई देशों की चुप्पी और पाकिस्तान जैसे देशों की मुश्किलें इस मुद्दे को और संवेदनशील बना रही हैं।

ट्रम्प क्यों बढ़ा रहे हैं अब्राहम अकॉर्ड्स का दायरा?

ट्रम्प का कहना है कि इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने से मुस्लिम देशों को आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक फायदा होगा। उन्होंने UAE, बहरीन, मोरक्को और सूडान का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन देशों को समझौते के बाद बड़ा लाभ मिला। ट्रम्प ने इसे पश्चिम एशिया में “नई शांति व्यवस्था” का आधार बताया। उनका मानना है कि अगर सऊदी अरब और दूसरे बड़े मुस्लिम देश भी इसमें शामिल होते हैं तो क्षेत्र की राजनीति पूरी तरह बदल सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि भविष्य में ईरान भी इस समझौते का हिस्सा बन सकता है, जिसने पूरे विवाद को और बढ़ा दिया।

पाकिस्तान के लिए क्यों मुश्किल है इजराइल को मान्यता देना?

पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर अब तक इजराइल को मान्यता नहीं देता। वहां फिलिस्तीन का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और भावनात्मक विषय माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना फिलिस्तीनी राष्ट्र के समाधान के इजराइल से रिश्ते बनाना पाकिस्तान की सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक जोखिम हो सकता है। पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीन और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक साथ उठाता रहा है। ऐसे में अगर वह अपने रुख में बदलाव करता है तो घरेलू राजनीति और विदेश नीति दोनों पर असर पड़ सकता है।

ट्रम्प की सलाह पर क्यों छा गई खामोशी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब ट्रम्प ने मुस्लिम देशों के नेताओं से इजराइल के साथ रिश्ते सुधारने की बात कही, तो वर्चुअल मीटिंग में कुछ सेकेंड के लिए सन्नाटा छा गया। खासकर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। माहौल इतना शांत हो गया कि ट्रम्प को मजाक में पूछना पड़ा कि 'क्या आप लोग अभी भी फोन लाइन पर हैं?' यह चुप्पी बताती है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा राजनीति में यह मुद्दा कितना संवेदनशील बना हुआ है।

गाजा युद्ध ने बदल दिया पूरा समीकरण

ट्रम्प की कोशिशों के बावजूद गाजा युद्ध के बाद अरब देशों में इजराइल के खिलाफ नाराजगी काफी बढ़ गई है। सऊदी अरब पहले इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा था, लेकिन हालात बदल गए। अब सऊदी साफ कह चुका है कि फिलिस्तीनी राष्ट्र के लिए ठोस कदम उठे बिना वह इजराइल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा। इसी वजह से ट्रम्प की नई पहल को आसान नहीं माना जा रहा। पश्चिम एशिया में धार्मिक, राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े कई समीकरण एक साथ काम कर रहे हैं।

ट्रम्प की रणनीति क्या है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रम्प पश्चिम एशिया में एक नया अमेरिकी समर्थक गठबंधन बनाना चाहते हैं, जिसमें इजराइल और प्रमुख अरब देश एक साथ हों। इस रणनीति के पीछे ईरान को संतुलित करना, सुरक्षा सहयोग बढ़ाना और आर्थिक साझेदारी मजबूत करना मुख्य लक्ष्य माना जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों की घरेलू राजनीति, फिलिस्तीन मुद्दा और क्षेत्रीय तनाव इस योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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