ईरान युद्ध को लेकर ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। अमेरिका बातचीत चाहता है, जबकि इजराइल सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में है।
डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प फिलहाल बातचीत और संभावित डील को मौका देना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू ईरान पर सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मंगलवार को करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान नेतन्याहू ने साफ कहा कि ईरान पर हमले रोकना बड़ी गलती होगी और दबाव बनाए रखना जरूरी है।
‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’ क्यों रोका गया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ईरान पर नए टारगेटेड हमलों की तैयारी कर रहा था। इस सैन्य अभियान को “ऑपरेशन स्लेजहैमर” नाम दिया गया था। हालांकि बाद में ट्रम्प प्रशासन ने इसे फिलहाल रोक दिया। ट्रम्प ने कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत खाड़ी देशों की अपील पर यह फैसला लिया गया।
अमेरिकी संसद में ट्रम्प को झटका
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी विरोध बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी सीनेट में ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 से पास हुआ। इस प्रस्ताव का समर्थन कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी किया। यदि यह कानून बनता है, तो ईरान के खिलाफ लंबे सैन्य अभियान के लिए ट्रम्प को कांग्रेस की मंजूरी लेनी पड़ सकती है। वहीं वॉशिंगटन डीसी में पूर्व सैनिकों और युद्ध विरोधी समूहों ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल सांसद Tammy Duckworth और Tim Kaine ने कहा कि अमेरिका को एक और बड़े युद्ध में नहीं धकेला जाना चाहिए।
तेल बाजार और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव
युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। निवेशकों को डर है कि यदि संघर्ष बढ़ा, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बना हुआ है, क्योंकि दुनिया की बड़ी तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। इसी बीच ADNOC ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने वाली नई पाइपलाइन का करीब 50% काम पूरा हो चुका है।
ईरान का दावा- हमारे पास अभी कई सीक्रेट हथियार
ईरान ने दावा किया है कि उसके पास अभी कई ऐसे आधुनिक हथियार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल अब तक युद्ध में नहीं किया गया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यदि दोबारा हमला हुआ तो जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक होगा। वहीं ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका की तरफ से मिले नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है।
युद्ध का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर
United Nations की एजेंसी FAO ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में संकट बढ़ता है, तो दुनिया में खाद्य संकट और महंगाई बढ़ सकती है। युद्ध का असर अब दूसरे देशों पर भी दिखने लगा है। श्रीलंका के चाय उद्योग पर इसका सीधा असर पड़ा है। वहां निर्यात घटने और ईंधन महंगा होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। इस बीच मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई अनिश्चितता में डाल दिया है।