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Trump Iran Deal Update

ईरान डील पर ट्रम्प का बड़ा दावा, होर्मुज खुलेगा; परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ा दबाव

डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ संभावित समझौते की शर्तें सार्वजनिक कर दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट खोलने, यूरेनियम नष्ट करने और नाकेबंदी हटाने जैसे फैसलों से पश्चिम एशिया में नई हलचल बढ़ गई है।


ईरान डील पर ट्रम्प का बड़ा दावा होर्मुज खुलेगा परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ा दबाव

Middle East Tension news |

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार खुलकर उन शर्तों का जिक्र किया है, जिन पर दोनों देशों के बीच संभावित समझौता हो सकता है। सबसे बड़ा दावा उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किया। ट्रम्प ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खुला रखा जाएगा। इसका मतलब यह है कि दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक पर जहाजों की आवाजाही सामान्य रह सकती है। इससे वैश्विक तेल बाजार और एशियाई देशों पर सीधा असर पड़ सकता है।

व्हाइट हाउस में चल रही बैठकों के बीच ट्रम्प के बयान ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। वहीं इजराइल और लेबनान सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका ने बदला रुख

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा रहा है। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई कई समुद्री माइंस पहले ही नष्ट की जा चुकी हैं। बाकी माइंस हटाने की जिम्मेदारी ईरान निभाएगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी तरह की रुकावट का असर सीधे पेट्रोल और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है।

ट्रम्प ने साफ किया कि इस रूट पर किसी तरह का टोल नहीं लगाया जाएगा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को स्थिर रखने का संदेश देना चाहता है।

परमाणु ठिकानों पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव

ट्रम्प ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ों के नीचे मौजूद परमाणु ठिकानों में रखे यूरेनियम को बाहर निकालकर नष्ट किया जाएगा। इस प्रक्रिया में अमेरिका, चीन, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की भूमिका होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित करीब 440 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बनाए हुए हैं। ट्रम्प ने यह भी याद दिलाया कि करीब 11 महीने पहले अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स ने इन ठिकानों को निशाना बनाया था। अब उसी परमाणु ढांचे को नियंत्रित करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ती दिख रही है।

इजराइल की चेतावनी से लेबनान में बढ़ी बेचैनी

एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की चर्चा है, दूसरी तरफ इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। इजराइली सेना ने जेफ्ता शहर के लोगों को तुरंत इलाका खाली करने को कहा है। सेना का दावा है कि हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ जल्द बड़ा ऑपरेशन चलाया जा सकता है। इसके पहले भी कई सीमावर्ती इलाकों में लोगों को चेतावनी दी जा चुकी है। लगातार मिल रही इन चेतावनियों से लेबनान के दक्षिणी हिस्से में डर और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इससे यह भी साफ हो रहा है कि क्षेत्रीय संघर्ष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

अब्राहम अकॉर्ड्स पर ईरान ने जताई नाराजगी

ईरान ने ट्रम्प की उस पहल को भी खारिज कर दिया है, जिसमें मुस्लिम देशों को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल करने की अपील की गई थी। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने कहा कि किसी भी क्षेत्रीय समझौते को बाहरी दबाव में नहीं थोपा जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि स्थायी शांति वही मॉडल दे सकता है, जो क्षेत्रीय देशों के हितों और जमीनी हालात को ध्यान में रखकर तैयार हो। फतहली ने यह भी संकेत दिया कि कई देश इस प्रस्ताव को लेकर सहज नहीं हैं। हाल के दिनों में ट्रम्प ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन समेत कई देशों से इस समझौते में शामिल होने की अपील की थी। लेकिन ईरान ने इसे अपने क्षेत्रीय प्रभाव के खिलाफ रणनीतिक दबाव बताया है।

व्हाइट हाउस में जारी है अंतिम दौर की चर्चा

ट्रम्प फिलहाल अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में लगातार बैठकें कर रहे हैं। माना जा रहा है कि 60 दिन के संभावित सीजफायर और परमाणु कार्यक्रम पर नए फ्रेमवर्क को लेकर जल्द फैसला सामने आ सकता है। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पहले भी शुरुआती स्तर पर बातचीत हो चुकी है। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह बातचीत किसी औपचारिक समझौते में बदलती है या फिर पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर नए टकराव की ओर बढ़ता है।

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