कोलकाता की ऐतिहासिक रेड रोड पर 107 साल बाद बकरीद की नमाज नहीं हुई। नई सरकारी नीति के बाद नमाज ब्रिगेड परेड ग्राउंड में कराई गई, जिससे राजनीति और प्रशासन दोनों में चर्चा तेज हो गई।
पश्चिम बंगाल में इस बार बकरीद सिर्फ त्योहार की वजह से नहीं, बल्कि एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के कारण भी चर्चा में रही। कोलकाता की ऐतिहासिक रेड रोड पर 107 साल बाद ईद की नमाज नहीं हुई। राज्य सरकार के नए फैसले के बाद नमाज को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट कर दिया गया। सालों से चली आ रही इस परंपरा के टूटने को बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर इसलिए क्योंकि रेड रोड पर होने वाली नमाज सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी मानी जाती थी।
क्यों खास मानी जाती है रेड रोड
कोलकाता की रेड रोड शहर की सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त सड़कों में गिनी जाती है। यह मैदान इलाके से गुजरती है और विक्टोरिया मेमोरियल, फोर्ट विलियम और रेस कोर्स जैसे प्रमुख स्थलों के बेहद करीब है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की परेड से लेकर ऐतिहासिक आयोजनों तक, रेड रोड हमेशा प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रही है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसे अस्थायी हवाईपट्टी के रूप में भी इस्तेमाल किया गया था। इसी सड़क पर पिछले 107 वर्षों से ईद की नमाज अदा की जाती रही थी।
1919 की बारिश से शुरू हुई थी परंपरा
जानकारी के मुताबिक शुरुआत में ईद की नमाज शहीद मीनार मैदान में होती थी। लेकिन 1919 में भारी जलभराव के कारण आयोजन रेड रोड पर शिफ्ट किया गया था। उसके बाद से हर साल ईद और बकरीद पर यहां बड़े स्तर पर नमाज अदा की जाती रही। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अक्सर रेड रोड पहुंचकर लोगों को ईद की शुभकामनाएं देती थीं। इस बार पहली बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई और नमाज ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित की गई।
सरकार ने क्यों बदली व्यवस्था
नई सरकार ने सत्ता संभालने के बाद सार्वजनिक सड़कों पर नमाज और बड़े धार्मिक आयोजनों को लेकर सख्त रुख अपनाया। प्रशासन का तर्क है कि सड़क पर नमाज होने से कई घंटों तक ट्रैफिक प्रभावित होता है और आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सरकार का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के लिए खुले मैदान ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित विकल्प हैं। इसी नीति के तहत रेड रोड पर नमाज की अनुमति नहीं दी गई।
शुरुआत में हुआ विरोध, फिर मिला समर्थन
फैसले के बाद शुरुआती दौर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध देखने को मिला। हालांकि बाद में मुस्लिम समाज के कई लोगों ने भी इसे व्यावहारिक फैसला बताया। कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने कहा कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड ज्यादा खुला स्थान है और वहां नमाजियों को सुविधा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के लिए भी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था संभालना आसान हो जाता है।
बंगाल की राजनीति में नया संकेत
रेड रोड से नमाज हटने को सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह फैसला राज्य की बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं और कानून-व्यवस्था आधारित प्रशासनिक मॉडल का संकेत भी माना जा रहा है। बकरीद के दिन कोलकाता में इस बदलाव की सबसे ज्यादा चर्चा रही, क्योंकि एक सदी से ज्यादा पुरानी परंपरा पहली बार बदली हुई नजर आई।