सर्वोच्च न्यायालय ने चंबल में अवैध रेत खनन पर सख्त टिप्पणी करते हुए माफिया को ‘आधुनिक डाकू’ बताया। मुरैना में वनरक्षक हत्या मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई तय की गई है।
नई दिल्ली। चंबल अंचल में अवैध रेत खनन और उससे जुड़े बढ़ते हिंसक अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने रेत माफिया को ‘चंबल के आधुनिक डाकू’ बताते हुए कहा कि ये गिरोह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने हाल ही में मुरैना जिले में वनरक्षक हरकेश गुर्जर की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए अगले सप्ताह सुनवाई तय की है और संबंधित पक्षों को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।पीठ ने टिप्पणी की कि यदि राज्य सरकारें प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में विफल रहती हैं और माफिया इस तरह खुलेआम हिंसा करते हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। अदालत ने यह भी कहा कि रेत माफिया पुलिस से बेहतर हथियारों से लैस होकर बेखौफ वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
मुरैना में वनरक्षक की हत्या से बढ़ी चिंता
मुरैना के अंबाह गेम रेंज में बुधवार सुबह वनरक्षक हरकेश गुर्जर को अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने के दौरान कुचलकर मार दिया गया। जानकारी के अनुसार, हरकेश ने डंडे के सहारे ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक ने उन्हें टक्कर मार दी। गिरने के बाद ट्रैक्टर का पहिया उनके सिर के ऊपर से गुजर गया।घटना के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया। मामले में ट्रैक्टर मालिकों के रूप में पवन तोमर और सोनू चौहान के नाम सामने आए हैं।
चंबल में रेत माफिया का खौफ, कई पुराने मामले
चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन से जुड़े हिंसक मामलों का लंबा इतिहास रहा है। पिछले कुछ वर्षों में 75 से अधिक लोगों की मौत ऐसे मामलों में हो चुकी है।
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2014: आरक्षक धर्मेंद्र चौहान को ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या
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2016: वन रक्षक नरेंद्र शर्मा की इसी तरह मौत
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जून 2018 (मुरैना): रेत से भरे ट्रैक्टर ने 21 लोगों को कुचला, 15 की मौत
इन घटनाओं ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अभयारण्य और खनन पर भी कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य की सीमा में बदलाव कर 732 हेक्टेयर क्षेत्र को खनन के लिए मुक्त करने वाली अधिसूचना पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने इसे कानून के विरुद्ध बताते हुए पर्यावरणीय संतुलन को लेकर चिंता जताई।वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल द्वारा रोजगार के मुद्दे को उठाए जाने पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रोजगार की कमी अवैध खनन का औचित्य नहीं बन सकती।
जमीनी स्तर पर चुनौती बरकरार
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और स्वतः संज्ञान के बाद चंबल क्षेत्र में रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाना राज्य सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।