कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। उन्होंने साफ किया कि वे सक्रिय राजनीति में विधायक के रूप में ही बने रहेंगे।
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री पद से हटने के कुछ घंटों बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। 80 वर्षीय नेता ने साफ कर दिया कि उनका इरादा राष्ट्रीय राजनीति में जाने का नहीं है और वे सक्रिय राजनीति में विधायक के रूप में ही बने रहेंगे। यह बयान उस समय आया जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उन्हें राज्यसभा भेजने की चर्चा तेज थी। लेकिन सिद्धारमैया ने स्पष्ट कर दिया कि वे इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे।
राज्यसभा प्रस्ताव को किया अस्वीकार
कांग्रेस हाईकमान की ओर से सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने की पेशकश की गई थी। इसे पार्टी में संतुलन साधने और नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि, सिद्धारमैया ने इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में कोई रुचि नहीं है और वे जमीनी राजनीति से जुड़े रहना चाहते हैं।
कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंदरूनी सहमति बनाई है। डीके शिवकुमार को अगले मुख्यमंत्री के तौर पर आगे बढ़ाने की चर्चा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई एक अहम बैठक में इस राजनीतिक बदलाव पर चर्चा हुई थी, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और सिद्धारमैया के बीच विचार-विमर्श हुआ।
राहुल गांधी से हुई अहम बातचीत
सूत्रों के मुताबिक सिद्धारमैया और राहुल गांधी के बीच एक निजी बातचीत भी हुई थी, जो करीब 35 मिनट तक चली। इस दौरान पार्टी की भविष्य की रणनीति और कर्नाटक के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा हुई। इसी बातचीत में उन्हें राज्यसभा सीट का विकल्प भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
कांग्रेस की रणनीति और आगे की दिशा
पार्टी रणनीति के तहत कांग्रेस आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की तैयारी कर रही है। पार्टी का फोकस अब कर्नाटक से आगे बढ़कर अन्य राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है। इसी रणनीति के तहत नेतृत्व संतुलन और नई राजनीतिक भूमिका तय करने की कोशिशें चल रही हैं। फिलहाल सिद्धारमैया के फैसले के बाद कर्नाटक कांग्रेस की राजनीति में एक नया समीकरण बनता दिख रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।