महाराष्ट्र के पुणे में जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस ने जांच तेज कर दी है और सप्लाई चेन से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे प्रशासन को हिला कर रख दिया है। अलग-अलग इलाकों में हुई इस दर्दनाक घटना में अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया है। पुलिस के अनुसार मौतें पुणे सिटी और पिंपरी-चिंचवड पुलिस क्षेत्र में दर्ज की गई हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अवैध शराब की सप्लाई चेन इस पूरे मामले के पीछे काम कर रही थी। अब पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और कई आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
सप्लाई चेन तक पहुंची पुलिस की जांच
पिंपरी के एसीपी सचिन हिरे के मुताबिक डापोडी इलाके में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। पुलिस ने इस मामले में गैर इरादतन हत्या सहित गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि एक आरोपी वानखेड़े सप्लाई चेन का अहम लिंक था, जबकि प्रजापति नाम का दूसरा आरोपी अवैध शराब की सप्लाई और मिश्रण तैयार करने में शामिल बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरी सप्लाई नेटवर्क को ट्रेस करने में जुटी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जहरीला मिश्रण कहां और कैसे तैयार हुआ।
फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलासा
फॉरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि शराब में जहरीले रसायनों और विषैले पदार्थों की मिलावट की गई थी। रिपोर्ट डापोडी पुलिस स्टेशन को सौंप दी गई है, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई और तेज कर दी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अब पूरे मामले को संगठित अवैध शराब नेटवर्क के रूप में देख रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सवाल
इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। एनसीपी-एससीपी विधायक रोहित पवार ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध शराब कारोबार पर कार्रवाई में लापरवाही की गई है और कुछ मामलों को छिपाने की कोशिश भी हुई है। हालांकि इन आरोपों के बीच पुलिस जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि पूरी सप्लाई चेन को खत्म करने तक कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
लगातार मौतों के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ गया है। लोग अब अवैध शराब कारोबार पर सख्त कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस और आबकारी विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े नेटवर्क पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।