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Praggnanandhaa Wins Norway Chess 2026 Title

20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, नॉर्वे चेस चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय बने

20 वर्षीय भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 में जीत हासिल की, जिससे वह इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने वाले पहले भारतीय बन गए।


20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास नॉर्वे चेस चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय बने

भारतीय शतरंज के युवा सितारे R Praggnanandhaa ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।ओस्लो में खेले गए अंतिम दौर में प्रज्ञानानंदा ने जर्मनी के Vincent Keymer को हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ उनके कुल 18 अंक हो गए और उन्होंने टूर्नामेंट में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया।

आखिरी राउंड में पलटा मुकाबला

फाइनल राउंड से पहले अमेरिकी ग्रैंडमास्टर Wesley So 15.5 अंकों के साथ बढ़त बनाए हुए थे। हालांकि उनका मुकाबला ड्रॉ रहा और फैसला आर्मागेडन टाईब्रेकर में पहुंचा। टाईब्रेकर जीतने के बावजूद उन्हें केवल 1.5 अंक मिले, जिससे उनका कुल स्कोर 17 अंक तक पहुंच सका।दूसरी ओर प्रज्ञानानंदा ने क्लासिकल मुकाबले में जीत दर्ज कर पूरे 3 अंक हासिल किए और 18 अंकों के साथ खिताब पर कब्जा जमा लिया।

कार्लसन को दो बार हराकर बटोरी सुर्खियां

इस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा की सबसे बड़ी उपलब्धि विश्व नंबर-1 और सात बार के नॉर्वे चेस चैंपियन Magnus Carlsen को दो बार हराना रही।प्रज्ञानानंदा भारत के केवल दूसरे खिलाड़ी बने हैं जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार मात दी। इससे पहले 2007 में Viswanathan Anand ने यह कारनामा किया था।

आनंद और गुकेश भी नहीं जीत पाए थे यह खिताब

2013 में शुरू हुए नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का खिताब अब तक कोई भारतीय नहीं जीत सका था। पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन D Gukesh भी इस उपलब्धि से दूर रहे थे। गुकेश इस बार 8 अंकों के साथ छठे और अंतिम स्थान पर रहे, जबकि कार्लसन पांचवें स्थान पर रहे।

भारतीय शतरंज के स्वर्णिम दौर का नया अध्याय

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शतरंज ने विश्व मंच पर तेजी से अपनी पहचान मजबूत की है। विश्व चैंपियन गुकेश के बाद अब प्रज्ञानानंदा की यह उपलब्धि भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी की ताकत को दर्शाती है। विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार हराने और नॉर्वे चेस जैसा प्रतिष्ठित खिताब जीतने के बाद प्रज्ञानानंदा अब विश्व शतरंज के सबसे बड़े सितारों में गिने जा रहे हैं।

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