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Why Modi Urged Stop Gold Buy

PM मोदी ने सोना खरीदने से क्यों रोका? युद्ध, डॉलर और महंगाई के बीच बड़ा आर्थिक संकेत

प्रधानमंत्री मोदी ने एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है। इसके पीछे विदेशी मुद्रा भंडार, बढ़ता आयात बिल और मध्य-पूर्व संकट बड़ा कारण माना जा रहा है। जानिए इससे सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ेग


pm मोदी ने सोना खरीदने से क्यों रोका युद्ध डॉलर और महंगाई के बीच बड़ा आर्थिक संकेत

pm modi news |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में एक सभा के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीद और गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने की अपील की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। सरकार की सबसे बड़ी चिंता विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर मानी जा रही है।

भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और सोना आयात करता है। दोनों की कीमतें बढ़ने से डॉलर में भुगतान का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। मोदी ने पेट्रोल, डीजल और गैस के सीमित इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उनका संदेश साफ था कि आने वाले महीनों में आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं, इसलिए देश को अभी से सतर्क रहना होगा।

विदेशी मुद्रा भंडार पर क्यों बढ़ा दबाव

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, मई के पहले सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 7.8 अरब डॉलर घट गया। कुछ महीनों पहले यह रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और रुपये पर दबाव के कारण रिजर्व तेजी से नीचे आया। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये को ज्यादा कमजोर होने से रोकने के लिए RBI को बाजार में डॉलर बेचने पड़े। इससे विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई। यही वजह है कि सरकार अब आयात कम करने पर जोर दे रही है। खासकर उन चीजों पर, जिनका घरेलू उत्पादन सीमित है और जिनके लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करना पड़ता है।

भारत के लिए सोना क्यों बना आर्थिक चुनौती

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड कंज्यूमर देशों में शामिल है। घरेलू मांग का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। 2025-26 में सोने का आयात बढ़कर करीब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है। बढ़ती कीमतों ने आयात बिल को और भारी बना दिया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भारतीय समाज में परंपरा और बचत का हिस्सा भी है। शादी, त्योहार और पारिवारिक निवेश में इसकी बड़ी भूमिका रहती है। इसलिए सरकार की अपील के बावजूद मांग में बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद कम मानी जा रही है।

तेल संकट से महंगाई और रुपये दोनों पर खतरा

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। भारत अपनी जरूरत का 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। RBI पहले ही कह चुका है कि कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से विकास दर पर असर पड़ता है और महंगाई बढ़ सकती है। तेल और सोने दोनों का आयात बढ़ने से व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर लोगों से सहयोग मांगती दिख रही है।

क्या मोदी की अपील से सस्ता होगा सोना

सोमवार को सोने की कीमतों में हल्की गिरावट जरूर दर्ज हुई, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि घरेलू अपील का असर सीमित रहेगा। सोने की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार तय करता है। अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक तनाव जैसे फैक्टर गोल्ड मार्केट को प्रभावित करते हैं।

इस समय निवेशक तेल कीमतों और महंगाई को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। दिलचस्प बात यह है कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद सोने में बड़ी तेजी नहीं दिख रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई बढ़ी तो ब्याज दरों में कटौती टल सकती है, जिसका असर गोल्ड पर पड़ रहा है।

ज्वेलरी बाजार में दिख सकती है सतर्कता

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में गैर-जरूरी ज्वेलरी खरीदारी थोड़ी धीमी पड़ सकती है। खासकर बड़े निवेश और भारी खरीदारी करने वाले ग्राहक फिलहाल इंतजार का रुख अपना सकते हैं। हालांकि लंबे समय में भारतीय बाजार में सोने की मांग पूरी तरह कमजोर पड़ने की संभावना नहीं दिख रही। निवेश और सांस्कृतिक महत्व की वजह से गोल्ड की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर वैश्विक हालात और खराब होते हैं तो इस साल सोने की कीमतों में मौजूदा स्तर से 12 से 15 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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