Breaking News
  • पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर दोपहर 3 बजे तक 74.1% मतदान
  • यूपी में पंचायत चुनाव के लिए OBC आयोग बना, रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह आयोग अध्यक्ष
  • प्रयागराज में 5 गोली मारकर हिस्ट्रीशीटर की हत्या:, फोन करके घर से बुलाया
  • स्कूल छोड़ने वालों की पढ़ाई फिर शुरू कराएगी एमपी सरकार, शिक्षा घर योजना मंजूर
  • NEET पेपर लीक केस में लातूर से डॉक्टर गिरफ्तार, बेटे के लिए गेस पेपर खरीदा था
  • बंगाल के सभी मदरसों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य, CAA लागू, BSF को फेंसिंग के लिए जमीन दी
  • कॉकरोच जनता पार्टी के X अकाउंट पर रोक, इंस्टाग्राम पर 6 दिन में 1.26 करोड़ फॉलोअर्स हुए

होम > देश

PM Modi Cabinet Meeting

विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी की बड़ी बैठक, ईरान संकट से लेकर सरकार के 12 साल तक होगा मंथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश दौरे से लौटते ही मंत्रिपरिषद की अहम बैठक बुलाई है। ईरान संकट, अर्थव्यवस्था, सरकार के 12 साल और मंत्रालयों के कामकाज पर बड़ा मंथन होगा।


विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी की बड़ी बैठक ईरान संकट से लेकर सरकार के 12 साल तक होगा मंथन

pm modi Cabinet Meeting |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद गुरुवार को राजधानी दिल्ली में मंत्रिपरिषद की बड़ी बैठक कर रहे हैं। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत केंद्र सरकार के सभी प्रमुख मंत्री शामिल होंगे। नई दिल्ली स्थित ‘सेवा तीर्थ’ में होने वाली यह बैठक इस साल की मंत्रिपरिषद की पहली बैठक है। कई मायनों में अहम मानी जा रही है। सरकार के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ आने वाले महीनों की रणनीति और वैश्विक हालात का असर भी एजेंडे में शामिल है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की आशंकाओं के बीच हो रही यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, तेल कीमतों और व्यापार पर पड़ सकता है। साथ ही यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है, जब मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हैं। 

बैठक में किन मुद्दों पर रहेगा फोकस

सूत्रों के मुताबिक, बैठक शाम 5 बजे शुरू हुई। इसमें कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य मंत्री शामिल हुए हैं। जानकारी के अनुसार, इस मीटिंग में सरकार के भीतर चल रही तेज राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं के बीच सभी केंद्रीय मंत्रियों से इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी में ही रहने को कहा गया है।

सरकार का मुख्य फोकस अलग-अलग मंत्रालयों के प्रदर्शन, नीतियों के असर और अगले चरण की प्राथमिकताओं पर रहेगा। पिछले दो वर्षों में किए गए सुधारों और 12 साल की प्रमुख योजनाओं का ब्योरा पहले ही कैबिनेट सचिवालय को सौंपा जा चुका है। बैठक में इन रिपोर्ट्स पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

ईरान संकट ने क्यों बढ़ाई सरकार की चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात पर भी इस बैठक में गंभीर चर्चा हो सकती है। सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि अगर क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारत पर उसका आर्थिक असर कितना गहरा हो सकता है। विशेष तौर पर कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग रूट्स और आयात-निर्यात पर प्रभाव को लेकर रणनीति बनाई जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सेक्टर को लेकर मंत्रालयों को अतिरिक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए जा सकते हैं ताकि आम लोगों पर बोझ कम रहे।

क्या कैबिनेट फेरबदल के संकेत भी मिलेंगे?

बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन लंबे अंतराल के बाद हो रही इस बैठक ने अटकलों को बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि कुछ मंत्रालयों के प्रदर्शन और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बदलावों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि फिलहाल बैठक का आधिकारिक एजेंडा शासन और नीतियों की समीक्षा पर केंद्रित बताया गया है।

सरकार के 12 साल पूरे होने से पहले बड़ा मंथन

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब 9 जून को नरेंद्र मोदी सरकार अपने 12 साल पूरे करने जा रही है। सरकार इन वर्षों की उपलब्धियों, सुधारों और बड़े फैसलों का आकलन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत अगले 10 वर्षों की विकास रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। सरकार का जोर अब उन सुधारों पर है जिनका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन और रोजमर्रा की सुविधाओं पर दिख सके।

राजनीतिक और आर्थिक दोनों नजरों से अहम बैठक

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं है। यह आने वाले समय की राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय करने वाली बैठक भी मानी जा रही है। एक तरफ वैश्विक अस्थिरता का दबाव है, दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर विकास और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को संतुलन बनाना है।

ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक आने वाले महीनों की नीति, प्राथमिकताओं और संभावित राजनीतिक संदेशों को समझने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

Related to this topic: