केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि आने वाले समय में गाड़ियां सस्ते बायो-इथेनॉल ईंधन से दौड़ेंगी। उन्होंने कहा कि इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटेगी और लोगों का खर्च भी कम होगा।
देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान चर्चा में है। गडकरी ने दावा किया है कि आने वाले समय में भारत में गाड़ियां ऐसे ईंधन से चलेंगी, जिसकी लागत पेट्रोल-डीजल के मुकाबले काफी कम होगी। उन्होंने कहा कि बायो-इथेनॉल आधारित ईंधन से वाहन चलाने का खर्च करीब 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर पड़ सकता है।
नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल देश में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह हैं। ऐसे में सरकार इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को तेजी से बढ़ावा दे रही है। यही कारण है कि अब ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
आखिर क्या है ₹25 वाले ईंधन का पूरा गणित?
गडकरी ने अपनी निजी गाड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से 100 प्रतिशत बायो-इथेनॉल से चलने वाली कार का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके मुताबिक इथेनॉल की मौजूदा कीमत करीब 65 रुपये प्रति लीटर है, लेकिन यह गाड़ी चलते समय बिजली भी पैदा करती है। ऐसे में वास्तविक रनिंग कॉस्ट घटकर लगभग 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर रह जाती है।
दरअसल, फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल मिश्रित ईंधन या पूरी तरह इथेनॉल पर भी चल सकती हैं। सरकार का मानना है कि इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी और ईंधन आयात पर खर्च होने वाला भारी विदेशी मुद्रा भंडार भी बचेगा।
किसानों के लिए कैसे बदल सकता है खेल?
गडकरी ने कहा कि अब किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा उत्पादक भी बनेंगे। इथेनॉल का उत्पादन गन्ने, मक्का और कृषि उत्पादों से होता है। ऐसे में इसकी मांग बढ़ने से किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ सकता है। यही सवाल अब उठ रहा है कि क्या भविष्य में पेट्रोल पंपों की जगह इथेनॉल आधारित फ्यूल स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से बढ़ेगा? विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर उत्पादन और सप्लाई मजबूत हुई, तो भारत ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देख सकता है।
कौन-कौन सी कंपनियां ला रही हैं नई गाड़ियां?
गडकरी ने बताया कि पर्यावरण दिवस के मौके पर दिल्ली में मारुति सुजुकी अपनी 100 फीसदी इथेनॉल से चलने वाली कारें लॉन्च करेगी। इसके अलावा टोयोटा, टाटा, महिंद्रा और सुजुकी समेत 12 कंपनियां पहले ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतार चुकी हैं फिलहाल इलेक्ट्रिक स्कूटर, बस, ट्रक और ट्रैक्टर भी तेजी से बाजार में जगह बना रहे हैं। ऐसे में ऑटो इंडस्ट्री अब पेट्रोल और डीजल से आगे निकलने की तैयारी करती दिख रही है।
क्यों कम करना चाहती है सरकार पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता?
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक भारत अपनी जरूरत का करीब 87 फीसदी ईंधन विदेशों से आयात करता है। इससे न केवल आयात बिल बढ़ता है, बल्कि प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पूरी तरह बदलाव आने में अभी समय लगेगा।