NIA की जांच में खुलासा हुआ है कि पहलगाम और गगनगीर आतंकी हमलों में एक ही M-4 कार्बाइन का इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसियों ने दोनों हमलों के पीछे एक ही मॉड्यूल और पाकिस्तान कनेक्शन की बात कही है।
जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम और गगनगीर आतंकी हमलों को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों हमलों में इस्तेमाल किए गए कारतूस एक ही M-4 कार्बाइन से दागे गए थे। बैलिस्टिक जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इन दोनों घटनाओं को एक ही आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा माना है।
यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है, जब घाटी में आतंकियों के नेटवर्क और उनके विदेशी कनेक्शन को लेकर लगातार जांच चल रही है। NIA का दावा है कि दोनों हमलों के पीछे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा मॉड्यूल सक्रिय था, जिसे सीमा पार से निर्देश मिल रहे थे। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या घाटी में पिछले कुछ बड़े हमलों के पीछे एक ही नेटवर्क काम कर रहा था?
बैलिस्टिक जांच में कैसे खुला पूरा राज?
दरअसल, पहलगाम हमले की जांच के दौरान एजेंसियों ने घटनास्थल से मिले कारतूसों और ‘ऑपरेशन महादेव’ में बरामद हथियारों की फॉरेंसिक जांच कराई थी। रिपोर्ट में सामने आया कि गगनगीर और पहलगाम दोनों जगहों से मिले कारतूसों का मिलान एक ही M-4 कार्बाइन से हुआ। जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह वही हथियार था जो सुरक्षा बलों ने हाल ही में मारे गए आतंकियों से बरामद किया था। इसके बाद दोनों मामलों के बीच सीधा कनेक्शन स्थापित हुआ। फिलहाल एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या इसी मॉड्यूल ने पुंछ और रियासी में हुए पुराने हमलों में भी भूमिका निभाई थी।
कौन थे हमलों के पीछे बताए जा रहे आतंकी?
NIA की जांच में जिन आतंकियों के नाम सामने आए हैं उनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये तीनों 2023 से घाटी में सक्रिय थे और घने जंगलों में छिपकर लगातार हमले कर रहे थे। बताया जा रहा है कि ये आतंकी हमला करने के बाद लंबे समय तक लोकेशन बदलते रहते थे। यही वजह रही कि एजेंसियों को इन्हें ट्रैक करने में काफी समय लगा। हालांकि, ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान सुरक्षा बलों ने इन तीनों को मार गिराया। इसी ऑपरेशन में दो AK-47 और एक M-4 कार्बाइन भी बरामद हुई थी।
पाकिस्तान कनेक्शन पर क्या बोले अधिकारी?
जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों हमलों में पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स की भूमिका सामने आई है। डिजिटल फॉरेंसिक, IP ट्रैकिंग, सोशल मीडिया डेटा और एन्क्रिप्टेड चैट्स की मदद से कई अहम सुराग मिले हैं। NIA सूत्रों के अनुसार, आतंकी संगठन TRF यानी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने पहले पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में बयान बदल दिया। अधिकारियों का मानना है कि भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई के डर से ऐसा किया गया। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों को लगातार एन्क्रिप्टेड माध्यमों से निर्देश दिए जा रहे थे। एजेंसियां अब उन स्थानीय नेटवर्क्स की भी जांच कर रही हैं, जिन्होंने आतंकियों को मदद पहुंचाई हो सकती है।
घाटी की सुरक्षा रणनीति पर क्या पड़ेगा असर?
इस खुलासे के बाद घाटी में सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति और आक्रामक हो सकती है। खासकर उन मॉड्यूल्स पर फोकस बढ़ेगा जो लंबे समय से जंगलों और पहाड़ी इलाकों में छिपकर छोटे-छोटे हमलों को अंजाम देते रहे हैं। अब समझिए, जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हमले रोकना नहीं, बल्कि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है जो अलग-अलग घटनाओं में एक ही पैटर्न पर काम कर रहे हैं। फिलहाल NIA की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।