NFHS-6 में सामने आया है कि भारत में पारंपरिक परिवार नियोजन तरीकों का उपयोग बढ़ा है, जबकि आधुनिक गर्भनिरोधक घटे हैं। विशेषज्ञों ने अनचाही गर्भावस्था का खतरा बताया है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-6) में एक अहम बदलाव सामने आया है। भारत में विवाहित महिलाओं के बीच आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग घटा है, जबकि पारंपरिक परिवार नियोजन तरीकों की ओर रुझान बढ़ा है. यह रिपोर्ट 2023-24 के दौरान तैयार की गई है और इसमें साफ दिखता है कि परिवार नियोजन के तरीके बदल रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि इससे अनचाही गर्भावस्था का खतरा बढ़ सकता है।
आधुनिक गर्भनिरोधक उपयोग में गिरावट, बड़ा बदलाव सामने
NFHS-6 के मुताबिक, 15–49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में आधुनिक गर्भनिरोधक उपयोग घटकर 52.7 प्रतिशत रह गया है, जो NFHS-5 में 56.4 प्रतिशत था . अब समझिए, यह गिरावट भले ही छोटी लगती हो, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिए से इसका असर बड़ा हो सकता है। आधुनिक तरीकों में पिल्स, कंडोम, आईयूडी और नसबंदी जैसे विकल्प शामिल हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रजनन अधिकारों पर असर डाल सकती है।
पारंपरिक तरीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला बदलाव पारंपरिक तरीकों में बढ़ोतरी है। यह उपयोग 10.3 प्रतिशत से बढ़कर 16.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, दरअसल, पारंपरिक तरीके जैसे रिदम और विड्रॉअल मेथड अपेक्षाकृत कम प्रभावी माने जाते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे जोखिम भरा बदलाव बता रहे हैं। यही सवाल अब उठ रहा है कि इस बदलाव के पीछे क्या जागरूकता की कमी, डर या जानकारी की कमी है?
कुल परिवार नियोजन बढ़ा
रिपोर्ट यह भी बताती है कि कुल परिवार नियोजन उपयोग 66.7 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गया है यानी ज्यादा लोग अब परिवार नियोजन अपना रहे हैं, लेकिन वे आधुनिक तरीकों की बजाय पारंपरिक विकल्पों की ओर जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह “मिक्स्ड ट्रेंड” है जहां जागरूकता बढ़ी है, लेकिन सही विकल्पों का चयन कमजोर पड़ा है।
अनचाही गर्भावस्था का खतरा
डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बदलाव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता बढ़ने से अनचाही गर्भावस्था का जोखिम बढ़ सकता है। अब समझिए, यह सिर्फ गर्भनिरोधक का मुद्दा नहीं है, बल्कि महिलाओं की स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता और परिवार नियोजन अधिकारों से भी जुड़ा मामला है।
भारत में प्रजनन दर स्थिर
NFHS-6 के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर 2.0 पर स्थिर बनी हुई है, जो NFHS-5 के समान है। हालांकि यह संकेत देता है कि जनसंख्या स्थिरता बनी हुई है, लेकिन गर्भनिरोधक तरीकों में बदलाव भविष्य की नीतियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।