ईरान-अमेरिका तनाव के बीच केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 दिन का LPG स्टॉक रखने का निर्देश दिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ईंधन सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच हालिया तनातनी के बाद केंद्र सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों को कम से कम 30 दिन का LPG स्टॉक तैयार रखने का निर्देश दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार नहीं चाहती कि वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू गैस सप्लाई और आम लोगों की रसोई पर पड़े।
सरकार ने सिर्फ एलपीजी ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल के रणनीतिक भंडारण पर भी फोकस बढ़ा दिया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
सरकार क्यों बढ़ा रही LPG भंडारण क्षमता?
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि तेल कंपनियों को कम से कम 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक बनाए रखने को कहा गया है। मंत्रालय लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार पर कम से कम पड़े। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ते हैं या सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार का फोकस इस बार सिर्फ आपूर्ति बनाए रखने पर नहीं, बल्कि घबराहट और जमाखोरी जैसी स्थितियों को रोकने पर भी है।
रिफाइनरियां कैसे संभाल रही हैं दबाव?
सरकार के मुताबिक देश की रिफाइनरियां फिलहाल करीब 52 हजार मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं। वहीं मांग पहले के 80 हजार मीट्रिक टन से घटकर 72 हजार मीट्रिक टन रह गई है। अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग रिफाइनरियों में ऑप्टिमाइजेशन के जरिए उत्पादन संतुलित किया जा रहा है। C3 और C4 अणुओं के इस्तेमाल से सप्लाई को स्थिर रखने की कोशिश हो रही है। कुछ रिफाइनरियों के दोबारा संचालन में आने से भी राहत मिली है। हालांकि सरकार मान रही है कि मौसमी बदलाव और अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते मांग और आपूर्ति में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव डाल दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक तेल कंपनियां फिलहाल रोजाना करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत फरवरी के करीब 69 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मई में 106 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पहुंच गई है। इसी का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। बीते कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर ईंधन करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
जमाखोरी रोकने के लिए राज्यों को अलर्ट
केंद्र सरकार ने राज्यों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। राज्यों से कहा गया है कि ईंधन की जमाखोरी, कालाबाजारी और अवैध भंडारण रोकने के लिए विशेष प्रवर्तन दल बनाए जाएं। इसके साथ ही आम लोगों से अफवाहों से बचने और घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी न करने की अपील की गई है। सरकार फिलहाल यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सप्लाई चेन पर नियंत्रण बना हुआ है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।