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Melody Toffee Story

PM मोदी के मेलोनी को दिए गिफ्ट से फिर चर्चा में आई Melody, कैसे बनी भारत की सबसे यादगार टॉफी

PM मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को Melody टॉफी गिफ्ट की तो यह पुरानी चॉकलेटी टॉफी फिर चर्चा में आ गई। जानिए कैसे पारले की Melody 80-90 के दशक की सबसे यादगार कैंडी बनी।


pm मोदी के मेलोनी को दिए गिफ्ट से फिर चर्चा में आई melody कैसे बनी भारत की सबसे यादगार टॉफी

pm Modi Itali Tour |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को जब Melody टॉफी गिफ्ट की, तो सोशल मीडिया पर अचानक इस पुरानी चॉकलेटी कैंडी की चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि बचपन की यादों से जुड़ा हिस्सा है। गोल्डन और ब्राउन रैपर वाली यह टॉफी दशकों से भारतीय बाजार में मौजूद है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका नाम तब और सुर्खियों में आया, जब इसे भारतीय स्वाद और संस्कृति की पहचान के तौर पर पेश किया गया। 

सोशल मीडिया पर लोगों ने पुराने विज्ञापन, स्कूल के दिनों की यादें और मेलोडी की मशहूर टैगलाइन शेयर करनी शुरू कर दीं। इससे साफ दिखा कि यह ब्रांड आज भी लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

1983 में शुरू हुआ था Melody का सफर

Melody टॉफी को पारले कंपनी ने साल 1983 में लॉन्च किया था। उस दौर में चॉकलेट हर बच्चे की पहुंच में नहीं होती थी। ऐसे समय में कंपनी ने कम कीमत में चॉकलेट जैसा स्वाद देने वाला विकल्प बाजार में उतारा। कंपनी का मकसद साफ था। बच्चों को ऐसी टॉफी देना जो स्वाद में अलग लगे और जेब पर भारी भी न पड़े। धीरे-धीरे Melody छोटे शहरों से लेकर बड़े बाजारों तक पहुंच गई। आज यह टॉफी एक रुपये में बिकती है, लेकिन 80 और 90 के दशक में इसे खरीदना हर बच्चे के लिए आसान नहीं माना जाता था। यही वजह है कि उस दौर के बच्चों के बीच इसका अलग क्रेज बन गया।

आखिर दूसरी टॉफियों से अलग क्या था

Melody का स्वाद ही इसकी सबसे बड़ी पहचान बना। इस टॉफी को डबल लेयर डिजाइन के साथ तैयार किया गया। बाहर की परत में मुलायम कैरेमल और अंदर गाढ़ी चॉकलेट फिलिंग दी गई। जब लोग इसे खाते थे तो कैरेमल और चॉकलेट का मिश्रण बाकी टॉफियों से बिल्कुल अलग अनुभव देता था। यही कारण रहा कि बाजार में नई कैंडी आने के बावजूद मेलोडी की पकड़ कमजोर नहीं हुई। उस दौर में ज्यादातर टॉफियां सिर्फ मीठे स्वाद तक सीमित थीं, लेकिन मेलोडी (Melody) ने चॉकलेटी फ्लेवर को आम बच्चों तक पहुंचाया। यही इसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग ताकत बन गई।

'Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है' कैसे बना सुपरहिट डायलॉग

Melody की पहचान सिर्फ स्वाद से नहीं बनी। इसकी विज्ञापन लाइन ने भी इसे खास बना दिया। 'Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है?' यह सवाल आज भी लोगों को याद है। दिलचस्प बात यह रही कि विज्ञापन में इसका सीधा जवाब कभी नहीं दिया गया। आखिर में सिर्फ इतना कहा जाता था'Melody खाओ, खुद जान जाओ।' इस अधूरे जवाब ने लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा की। मार्केटिंग एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि यह भारतीय विज्ञापन इतिहास की सबसे यादगार टैगलाइन में से एक रही। यही वजह है कि दशकों बाद भी लोग इसे आसानी से दोहरा देते हैं।

फिल्मों से सोशल मीडिया तक कायम है Melody का क्रेज

मेलोडी का असर सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं रहा। साल 2019 में आई फिल्म ‘छिछोरे’ में भी इसका मशहूर डायलॉग इस्तेमाल किया गया था। इससे नई पीढ़ी के बीच भी यह नाम फिर चर्चा में आया। आज बाजार में विदेशी चॉकलेट्स और प्रीमियम कैंडी की भरमार है। इसके बावजूद Melody छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह दिखाई देती है। ब्रांड एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी प्रोडक्ट का इतने लंबे समय तक लोकप्रिय बने रहना आसान नहीं होता। लेकिन Melody ने स्वाद, भावनात्मक जुड़ाव और यादगार विज्ञापन के दम पर अपनी अलग जगह कायम रखी है।

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