भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आई। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट में 280 KM/H रफ्तार वाली ट्रेन, स्टेशन और टनल निर्माण की बड़ी प्रगति ने देश में हाई स्पीड रेल का सपना और करीब ला द
भारत की पहली हाई स्पीड ट्रेन परियोजना अब सिर्फ प्लान नहीं रही। इसकी झलक अब आधिकारिक स्तर पर दिखाई देने लगी है। रेल मंत्रालय ने मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की बुलेट ट्रेन इमेज नई दिल्ली स्थित रेल भवन के गेट नंबर-4 पर प्रदर्शित की है। इस प्रोजेक्ट को देश की सबसे बड़ी रेल टेक्नोलॉजी छलांग माना जा रहा है।
भारतीय रेलवे में 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाला यह सिस्टम भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नया आकार देने की तैयारी में है। रेलवे के मुताबिक यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं बल्कि पूरी यात्रा व्यवस्था को बदलने वाला मॉडल है।
जापान के साथ मिलकर तैयार हो रहा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर कुल 508 किलोमीटर लंबा है। इसे भारत और जापान की साझेदारी से विकसित किया जा रहा है। जापान इस परियोजना को तकनीकी और आर्थिक दोनों तरह से सपोर्ट कर रहा है। यह रूट महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरता है। इस पूरे कॉरिडोर में 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। यह नेटवर्क पश्चिम भारत के बड़े आर्थिक केंद्रों को सीधे हाई स्पीड ट्रैवल से जोड़ देगा।
स्टेशन और पुल निर्माण में तेजी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही संसद में इस प्रोजेक्ट की प्रगति साझा कर चुके हैं। 12 में से 8 स्टेशनों की नींव का काम पूरा हो चुका है। इनमें वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। परियोजना के तहत अब तक 17 नदी पुल पूरे किए जा चुके हैं। नर्मदा, माही, ताप्ती और साबरमती जैसी नदियों पर काम लगातार जारी है। महाराष्ट्र हिस्से में भी कई ब्रिज निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही ठाणे, सूरत और साबरमती में डिपो निर्माण तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
बीकेसी स्टेशन और अंडरसी टनल प्रोजेक्ट में बड़ा मोड़
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स यानी बीकेसी स्टेशन पर भी काम तेज है। रेलवे के अनुसार यहां करीब 91 प्रतिशत खुदाई पूरी हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा अंडर-सी टनल है। यह समुद्र के नीचे करीब 21 किलोमीटर लंबी टनल होगी। महाराष्ट्र के घनसोली और शिलफाटा के बीच इसका 4.8 किलोमीटर हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है। यह सेक्शन भारत की इंजीनियरिंग क्षमता के लिए एक बड़ा टेस्ट माना जा रहा है।
मेक इन इंडिया के साथ हाई स्पीड रेल टेक्नोलॉजी पर फोकस
वंदे भारत की सफलता के बाद अब इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड मिलकर 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन विकसित कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से भारत को हाई स्पीड रेल तकनीक में विशेषज्ञता मिलेगी। ट्रैक, सिग्नलिंग, कोच निर्माण और मेंटेनेंस सिस्टम में देश आत्मनिर्भर बनेगा। रेलवे इसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से जोड़कर देख रहा है। सरकार का कहना है कि जमीन अधिग्रहण कानून के तहत हुआ है और प्रभावित लोगों को मुआवजा भी दिया गया है।