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बंगाल चुनाव भविष्यवाणी पर IIMC प्रोफेसर को नोटिस

IIMC प्रोफेसर को नोटिस: बंगाल में BJP की ‘प्रचंड जीत’ की भविष्यवाणी और टीवी डिबेट में हिस्सा लेने पर नोटिस

IIMC के प्रो. राकेश उपाध्याय को बंगाल चुनाव में BJP की जीत की भविष्यवाणी और टीवी डिबेट में हिस्सा लेने पर नोटिस जारी। सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से जारी हुआ नोटिस । जानिए पूरा मामला और विवाद का कारण।


iimc प्रोफेसर को नोटिस बंगाल में bjp की ‘प्रचंड जीत’ की भविष्यवाणी और टीवी डिबेट में हिस्सा लेने पर नोटिस

नई दिल्ली। भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के प्रोफेसर राकेश उपाध्याय को पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट और टीवी डिबेट में भागीदारी के मामले में नोटिस जारी किया गया है। संस्थान की ओर से उनसे 5 जून तक जवाब मांगा गया है।  विवाद की शुरुआत 3 मई को की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी बताई जा रही है। प्रोफेसर राकेश उपाध्याय ने अपने बंगाल प्रवास और लोगों से हुई बातचीत के आधार पर दावा किया था कि बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाने जा रही है। यह टिप्पणी मतगणना से ठीक पहले सामने आई थी ।

टीवी डिबेट में शामिल होने पर मांगा स्पष्टीकरण

सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर उपाध्याय चुनावी मामलों के जानकार और राजनीतिक विश्लेषक के रूप में एक टीवी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि यह कार्यक्रम उनकी नियमित कार्यावधि समाप्त होने के बाद हुआ था नोटिस में कथित तौर पर उनसे पूछा गया है कि उन्होंने राजनीतिक विषय से जुड़ी टीवी बहस में भाग क्यों लिया।  शिकायत करने वाले कुछ प्राध्यापकों का आरोप है कि यह आचरण सेवा नियमों और सीसीएस नियमावली के अनुरूप नहीं है। वहीं उपाध्याय के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने एक विशेषज्ञ और अध्येता के रूप में अपनी राय व्यक्त की थी।

क्या उर्दू पत्रकारिता विभाग का विवाद भी है वजह?

दरअसल, संस्थान के भीतर चर्चा केवल बंगाल चुनाव की भविष्यवाणी तक सीमित नहीं है। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उर्दू पत्रकारिता विभाग से जुड़ा विवाद भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, प्रोफेसर राकेश उपाध्याय 1 मई तक उर्दू पत्रकारिता विभाग के प्रभारी निदेशक भी थे। विभाग में सीमित दाखिलों को देखते हुए उन्होंने 22 अप्रैल 2026 को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें उर्दू पत्रकारिता की प्रवेश परीक्षा उर्दू लिपि के साथ-साथ देवनागरी लिपि में भी आयोजित करने की बात कही गई थी।

अगले ही दिन इस प्रस्ताव  को मंजूरी मिल गई और आदेश संस्थान के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने आवेदन किए। हालांकि कुछ शिक्षकों ने इस फैसले पर नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई, जिसके बाद आदेश वापस ले लिया गया और प्रोफेसर उपाध्याय को प्रभारी पद से कार्यमुक्त कर दिया।

मामला पहुंचा हाईकोर्ट, छात्रों को मिली राहत

उर्दू पत्रकारिता प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव वापस लिए जाने के बाद आवेदन कर चुके छात्रों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बताया जाता है कि संस्थान ने छात्रों की आवेदन फीस भी लौटा दी थी।हालांकि अदालत ने छात्रों को प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दी।  

नोटिस की चर्चा, जवाब का इंतजार

यही सवाल अब उठ रहा है कि प्रोफेसर राकेश उपाध्याय को जारी नोटिस केवल चुनावी टिप्पणी और टीवी डिबेट से जुड़ा मामला है या इसके पीछे संस्थान के भीतर चल रहे अन्य विवाद भी भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल संस्थान की ओर से जारी नोटिस पर उनका जवाब आना बाकी है।  

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