पंजाब AAP मंत्री अमन अरोड़ा के करीबी पर ED की छापेमारी से सियासत गरमाई। अरोड़ा ने आरोपों को साजिश बताया और गलत साबित होने पर राजनीति छोड़ने की कसम खाई।
पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के कथित करीबी सहयोगी के घर पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। मामला मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें पंजाब और चंडीगढ़ के कई ठिकानों पर ED ने एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
अमन अरोड़ा का जवाब
छापेमारी के बाद अमन अरोड़ा ने मीडिया से बातचीत में आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनका नाम राजनीतिक रूप से उन्हें बदनाम करने के लिए घसीटा जा रहा है।उन्होंने साफ कहा कि वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं और अगर किसी भी जांच में उनके खिलाफ गलत काम साबित होता है, तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
ED की कार्रवाई पर सवाल
अरोड़ा ने दावा किया कि शुरुआती ED बयान में उनका नाम नहीं था, लेकिन बाद में संशोधित बयान में उनका नाम जोड़ा गया। उन्होंने इसे चयनात्मक कार्रवाई बताते हुए राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
मंत्री ने अपने करीबी माने जा रहे गौरव धीर के साथ किसी भी प्रकार के व्यापारिक या वित्तीय संबंध से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी दोस्ती व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित है और इसका किसी भी व्यावसायिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
अमन अरोड़ा ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी राजनीति के तहत उन्हें निशाना बनाया जा रहा है उनके अनुसार, कुछ तथ्यों को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है ताकि गलत छवि बनाई जा सके।
अरोड़ा ने अल्टस परियोजना से जुड़े आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट पहले ही 2013-14 में स्वीकृत हो चुका था और सभी जरूरी मंजूरी नियमों के तहत दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित कंपनी ने सरकार को सभी बकाया भुगतान कर दिए हैं और अब कोई देनदारी नहीं बची है।