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Cockroach Party Controversy

कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत दीपके विवादों में, मीम पेज से 35 लाख फॉलोअर्स तक पहुंचा ट्रेंड

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाने वाले अभिजीत दीपके का पेज विवादों में आ गया है। मीम और व्यंग्य के नाम पर वायरल हुआ यह इंस्टाग्राम हैंडल अब सोशल मीडिया बहस का केंद्र बन गया है।


कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत दीपके विवादों में मीम पेज से 35 लाख फॉलोअर्स तक पहुंचा ट्रेंड

CJP |

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के एक बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक मीम ट्रेंड शुरू हुआ था। वह अब एक बड़े डिजिटल विवाद में बदलता दिख रहा है। इसी माहौल में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का इंस्टाग्राम हैंडल तेजी से वायरल हुआ। इसने कुछ ही दिनों में लाखों फॉलोअर्स जुटा लिए। लेकिन अब इस पेज को लेकर सिर्फ चर्चा नहीं हो रही है। अब इस पर आलोचना और सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या मीम कल्चर की यह दिशा सही है या नहीं।

वायरल होने के साथ बढ़ी आलोचना और बहस

दरअसल, यह इंस्टाग्राम पेज लॉन्च के कुछ ही घंटों में तेजी से वायरल हुआ और 35 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स तक पहुंच गया। हालांकि, इसके कंटेंट और व्यंग्यात्मक शैली को लेकर सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बहस शुरू हो गई है। एक वर्ग इसे डिजिटल सटायर और फ्रीडम ऑफ स्पीच मान रहा है, जबकि दूसरा इसे गंभीर मुद्दों का हल्का और असंवेदनशील मजाक बता रहा है।

मजाकिया शर्तों ने खड़े किए सवाल

पेज पर दी गई सदस्यता शर्तें भी विवाद का हिस्सा बन गई हैं। इसमें बेरोजगार और आलसी होना जैसी बातें लिखी गई हैं। इसके अलावा 11 घंटे ऑनलाइन रहने की शर्त को भी कई यूजर्स ने अजीब और भटकाने वाला बताया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह का कंटेंट युवाओं में गलत संदेश भी फैला सकता है।

अभिजीत दीपके की पृष्ठभूमि पर भी चर्चा

इस पेज के क्रिएटर अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले हैं। वह पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट के रूप में काम करते हैं। उन्होंने अमेरिका की Boston University से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है और पहले AAP की सोशल मीडिया टीम से भी जुड़े रहे हैं। उनका अनुभव डिजिटल कैंपेन और मीम-आधारित राजनीतिक रणनीति में रहा है। इसे अब इस विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर मीम कल्चर की सीमाओं पर सवाल

यह पूरा मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि सोशल मीडिया पर मीम और व्यंग्य की सीमा क्या होनी चाहिए। जहां एक तरफ इसे युवा अभिव्यक्ति माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे संवेदनशील मुद्दों का हल्का चित्रण कहकर आलोचना भी हो रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते ऐसे ट्रेंड अब चर्चा के साथ-साथ बहस का भी कारण बनते जा रहे हैं।

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