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CBSE OSM Row Action

CBSE के चेयरमैन और सचिव पर गिरी गाज, OSM विवाद के चलते पद से हटाया, जांच के आदेश

CBSE में ऑन स्क्रीन मार्किंग विवाद के बीच बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। चेयरमैन और सचिव को हटाया गया, टेंडर जांच के आदेश दिए गए और री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की भी पुष्टि हुई है।


cbse के चेयरमैन और सचिव पर गिरी गाज osm विवाद के चलते पद से हटाया जांच के आदेश

CBSE |

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया अब प्रशासनिक संकट में बदल गई है। शिकायतों और टेंडर विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बोर्ड के शीर्ष स्तर पर बदलाव कर दिए हैं। री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों और साइबर अटैक के दावों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। छात्रों की शिकायतों से शुरू हुआ मामला अब टेंडर जांच और सिस्टम सुरक्षा तक पहुंच गया है।

ऑन स्क्रीन मार्किंग विवाद में शीर्ष स्तर पर कार्रवाई

सरकार ने CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को हटाने का फैसला OSM प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद लिया है। छात्रों की शिकायतें सामने आने के बाद पूरे सिस्टम की समीक्षा शुरू हुई, जिसमें टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के आदेश भी शामिल हैं। इस पूरे मामले में यह भी सामने आया कि ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को पहली बार बड़े स्तर पर लागू किया गया था, जिसके बाद रिजल्ट और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।

री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक से बढ़ी चिंता

CBSE के अनुसार री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर बड़े पैमाने पर साइबर अटैक की कोशिश की गई। कुछ ही मिनटों में लाखों एक्सेस अटेंप्ट दर्ज हुए और सिस्टम फाइलों तक अनधिकृत पहुंच की कोशिश भी हुई। इसके बावजूद पोर्टल पूरी तरह बंद नहीं हुआ और हजारों छात्रों ने समय रहते आवेदन भी कर दिया। हालांकि इस घटना ने परीक्षा सिस्टम की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्र शिकायतों के बाद संसदीय स्तर तक पहुंची जांच

OSM प्रक्रिया को लेकर छात्रों की शिकायतें संसद की स्थायी समिति तक पहुंचीं। कुछ छात्रों ने प्रणाली में कई खामियों का दावा किया है और टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने अब इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है और तकनीकी व प्रशासनिक पहलुओं की जांच शुरू हो गई है।

OSM सिस्टम में गड़बड़ी और टेंडर पर सवाल

मामला केवल मार्किंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टेंडर आवंटन प्रक्रिया तक पहुंच गया है। COEMPT नामक एजेंसी को दिए गए टेंडर को लेकर भी जांच के आदेश दिए गए हैं। इस बीच कुछ राज्यों में पहले से इस कंपनी से जुड़े विवादों का भी उल्लेख सामने आया है, जिससे जांच और गहरी हो गई है।

छात्रों का विरोध और राजनीतिक दबाव

इस पूरे विवाद के बीच छात्र संगठन और राजनीतिक छात्र विंग भी सक्रिय हो गए हैं। विरोध प्रदर्शन, जांच की मांग और शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं। अब मामला केवल परीक्षा प्रणाली का नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा प्रशासन और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।

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