धार भोजशाला पर हाईकोर्ट फैसले के बाद पहले शुक्रवार को महाआरती और हवन-पूजन होगा। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, शहर में 2 हजार पुलिसकर्मी तैनात।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा धार की भोजशाला को मंदिर मानने के फैसले के बाद आज पहला शुक्रवार है। हिंदू समाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक हवन-पूजन और महाआरती करने जा रहा है। प्रशासन को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की आशंका है, जिसके चलते पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर दी है। कमाल मौला मस्जिद पक्ष का कहना है कि यहां सदियों से जुमे की नमाज अदा होती रही है और वे कानूनी लड़ाई संवैधानिक दायरे में लड़ेंगे।
हाईकोर्ट फैसले के बाद पहली महाआरती
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा कि 721 वर्षों के संघर्ष के बाद हिंदू समाज पहली बार “पूर्ण स्वाभिमान” के साथ मां सरस्वती की महाआरती करेगा। समिति पहले शोभायात्रा निकालने वाली थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। समिति सदस्यों का कहना है कि यह आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनका अगला लक्ष्य भोजशाला के “मूल स्वरूप” की पुनर्स्थापना और मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाना है।
मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश को एकतरफा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सदर अब्दुल समद ने कहा कि कमाल मौला मस्जिद में लगभग 700 वर्षों से जुमे की नमाज होती रही है और इस परंपरा को प्रभावित किए जाने से समाज में निराशा है। शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि मुस्लिम समाज न्यायपालिका का सम्मान करता है और अब सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद है। उन्होंने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।
धार शहर में 2 हजार पुलिसकर्मी तैनात

संवेदनशील माहौल को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा के नेतृत्व में गुरुवार को शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया। प्रशासन के अनुसार धार शहर और भोजशाला परिसर में करीब 1500 से 2000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था में RAF, पैरामिलिट्री फोर्स, STF और घुड़सवार पुलिस बल की आठ विशेष कंपनियां भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की विशेष निगरानी टीम सक्रिय है ताकि किसी तरह की अफवाह या भड़काऊ पोस्ट को तुरंत रोका जा सके।