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भारत का भविष्य और संघ की भूमिका

भारत की राह रोकने वाली शक्तियों को सफल न होने दें

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उद‌घोष किया कि हिंदू समाज को एकजुट कर भारत का भविष्य संवारने की जरूरत है, और इसके लिए संघ की विशेष कार्यपद्धति विकसित की गई है।


भारत की राह रोकने वाली शक्तियों को सफल न होने दें

सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा संघ ने हिंदू समाज को एकजुट करने विकसित की विशेष कार्यपद्धति, फिर किया उ‌द्घोष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कार्यकर्ता विकास वर्ग (तृतीय वर्ष) का अपना विशिष्ट महत्व है। प्रतिवर्ष नागपुर में आयोजित इस वर्ग के समापन समारोह को सरसंघचालक मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हैं। परंपरा है कि देश का कोई एक लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्ति इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होता है। इस वर्ष के समारोह में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने सरसंघचालक के साथ मंच

साझा किया। वस्तुतः नागपुर कार्यकर्ता वर्ग के समारोह में सरसंघचालक का वक्तव्य संघ की सामयिक दृष्टि से भी देश-दुनिया को अधतन करने वाला दस्तावेज जैसा होता है। सालभर में सामाजिकी, आर्थिकी, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन के समकालीन घटनाक्रम पर संघ के सुस्पष्ट और आधिकारिक रुख का पता भी सरसंघचालक के वक्तव्य से सामने आता है। विमर्श के विविध पक्षों को यह वक्तव्य सीधे दिशा देता है।

संघ को समझने आइए और देखिए

नागपुर में 11 मई से चार जून तक कार्यकतां विकास वर्ग चला। इसमें गुणवान कार्यकर्ताओं को गढ़ने के मंत्र दिए गए। वर्ग में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दो-टूक कहा कि संथ में आइए, देखिए, समझिए, केवल दर्शक मत बने रहिए। उन्होंने उद‌घोष किया कि भारत की राह रोकने वाली शक्तियों को सफल न होने दें। यशस्वी होकर दुनिया को एक नया रास्ता देने वाला भारत बनाएं। भारत का समय आ गया है, हमें अपनी तैयारी तेज करनी है। भारत का भविष्य जिस कचे पर है, वह हिंदू समाज संगठित और जागृत हो रहा है। संघ ने एक कार्यपद्धति ऐसी विकसित की ताकि सारी तरह की विभिन्नताओं के साथ हिंदू समाज एकजूट आए। परिस्थितियां भी उसी अनुरूप बन रही हैं। दुनिया को भारत की आवश्यकता है, क्योंकि सभी को साथ में जोड़ कर विकास की कल्पना भारत ही कर सकता है।

स्वामी विवेकानंद का स्वप्न साकार होते देखेंगे

डॉ. भागवत कहा कि हम जल्दी ही स्वामी विवेकानंद के उस स्वप्न को जल्दी ही साकार होते देखेंगे, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत माता पहले से अधिक उच्च सिंहासन पर पहले से भी अधिक गौरव से साथ स्थापित हो रही है। हम देखते हैं कि बल सम्पन्न देश मनमानी करते हैं। चाहे तो किसी देश को हथिया लो, चाहे तो किसी देश पर बम मार दो या दुनिया के तेल की सप्लाई बंद कर दो। भारत के बारे में यह विचार बने कि वह शक्ति सम्पन्न होकर ऐसा नहीं करेगा बल्कि सबको साथ लेकर चलेगा धर्म संरक्षण से राष्ट्र को परम वैभव-संपन्न बनाना है.

सरसंघचालक ने आह्वान किया कि अपने धर्म का संरक्षण करते हुए अपने राष्ट्र को परम वैभव संपन्न बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष संघ की शाखा में आइये या फिर स्वयंसेवकों का सहयोग करिए या फिर स्वत: समाज और राष्ट्र हित में कोई भी कार्य करिए, हम स्वयं आप तक पहुंच जाएं। संघ के शताब्दी वर्ष के दो तिहाई कालखंड के बीच यह कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जाने माने उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला विशेष रूप से मौजूद रहे।



 

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