बीकानेर की ऐतिहासिक सांचू पोस्ट पहुंचे अमित शाह ने 1965 युद्ध का जिक्र करते हुए पाकिस्तान पर निशाना साधा। BSF जवानों संग नाश्ता किया और बॉर्डर सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश दिया।
राजस्थान के बीकानेर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित ऐतिहासिक सांचू पोस्ट मंगलवार को अचानक राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गई। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah यहां BSF जवानों के बीच पहुंचे और 1965 के भारत-पाक संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय जवानों ने पाकिस्तानियों को “पीठ दिखाकर भागने” पर मजबूर कर दिया था।
दरअसल, सांचू पोस्ट सिर्फ एक सीमा चौकी नहीं, बल्कि भारत-पाक सीमा संघर्ष के इतिहास की अहम गवाह मानी जाती है। ऐसे में गृहमंत्री का यहां पहुंचना सुरक्षा और राजनीतिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाह ने जवानों के साथ समय बिताया, बॉर्डर की स्थिति देखी और सीमा सुरक्षा को लेकर कई अहम संदेश दिए।
डेढ़ घंटे तक बॉर्डर पर रुके अमित शाह
गृहमंत्री सुबह हेलिकॉप्टर से सांचू पोस्ट पहुंचे। उनके साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma भी मौजूद रहे। करीब डेढ़ घंटे के दौरे में शाह ने जवानों से बातचीत की और सीमा पर तैनाती के अनुभव जाने। करीब 42 डिग्री तापमान के बीच उन्होंने दूरबीन से पाकिस्तान सीमा और जीरो पॉइंट क्षेत्र का निरीक्षण भी किया।
जवानों के साथ पारंपरिक नाश्ता करने की तस्वीरें भी सामने आईं, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा रही। यही वजह है कि इस दौरे को सिर्फ औपचारिक विजिट नहीं, बल्कि बॉर्डर पर तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाने वाले संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
“सांचू पोस्ट देखने की इच्छा पहले से थी”
प्रहरी सम्मेलन में अमित शाह ने कहा कि गृहमंत्री बनने से पहले भी उनके मन में सांचू पोस्ट देखने की इच्छा थी। उन्होंने 1965 के युद्ध का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय पाकिस्तान ने इस पोस्ट पर कब्जे की कोशिश की थी। शाह ने कहा कि 3 RAC और 13 ग्रेनेडियर के जवानों ने जवाबी कार्रवाई कर सांचू को भारत की सीमा में बनाए रखा।

उन्होंने कहा कि भारतीय जवानों की बहादुरी के सामने पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, भाषण के दौरान शाह ने सिर्फ अतीत की लड़ाई का जिक्र नहीं किया, बल्कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर भी संकेत दिए। उन्होंने BSF की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश के सीमा प्रहरी हर परिस्थिति में डटे रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और महिला बैरकों का भी जिक्र
अमित शाह ने अपने संबोधन में “ऑपरेशन सिंदूर” का जिक्र करते हुए कहा कि BSF जवानों ने पाकिस्तान को हमेशा की तरह मुंहतोड़ जवाब दिया। इसके साथ ही उन्होंने महिला सुरक्षा बलों के लिए तैयार बैरकों का उद्घाटन भी किया। शाह ने कहा कि 2030 तक सभी महिला जवानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
राजस्थान में 79 बैरकों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 67 का काम पूरा हो चुका है। अब समझिए, यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि सीमा सुरक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का संकेत भी माना जा रहा है।
बॉर्डर सुरक्षा और तस्करी पर होगी बड़ी बैठक
बीकानेर दौरे के दौरान गृहमंत्री की पांच सीमावर्ती जिलों के कलेक्टर और एसपी के साथ बैठक भी प्रस्तावित है। इसमें बॉर्डर पर बढ़ती तस्करी, ड्रोन गतिविधियों और सुरक्षा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। फिलहाल केंद्र सरकार राजस्थान से सटे सीमा क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
इसी क्रम में “वाइब्रेंट विलेज योजना” के तहत बॉर्डर के 184 गांवों को सड़क और 4G नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी भी शुरू की जा रही है। सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह योजना काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय से कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं की मांग उठती रही है।