दिल्ली से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI2651 लैंडिंग के दौरान टेल-स्ट्राइक का शिकार हो गई। रनवे से टकराने के बाद विमान को ग्राउंड कर दिया गया, सभी 179 यात्री सुरक्षित हैं।
दिल्ली से बेंगलुरु पहुंची एयर इंडिया की फ्लाइट AI2651 गुरुवार को बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गई। लैंडिंग के दौरान विमान अचानक हवा में असंतुलित हुआ और उसकी टेल रनवे से टकरा गई। कुछ सेकंड के लिए विमान के अंदर बैठे 179 यात्रियों की सांसें अटक गईं। हालांकि पायलट ने स्थिति को संभाल लिया और विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार दिया। घटना के बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां और तकनीकी टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं।
शुरुआती जांच में हादसे की वजह ‘वेक टर्बुलेंस’ बताई जा रही है। यह वही खतरनाक स्थिति होती है, जब आगे उड़ रहे बड़े विमान की हवा पीछे आने वाले विमान का संतुलन बिगाड़ देती है।
बोइंग 747 की हवा बनी खतरा
एविएशन सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया की फ्लाइट जब बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उतरने वाली थी, उसी समय उसके आगे एक Boeing 747 विमान उड़ रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े विमानों के पीछे तेज हवा का भंवर बनता है, जिसे ‘वेक टर्बुलेंस’ कहा जाता है। अगर पीछे आ रहा विमान इस दबाव में आ जाए तो उसका संतुलन अचानक बिगड़ सकता है। बताया जा रहा है कि AI2651 इसी टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। लैंडिंग के दौरान विमान का पिछला हिस्सा नीचे झुका और टेल रनवे से टकरा गई।
टेल-स्ट्राइक के बाद तुरंत रोका गया विमान
घटना के तुरंत बाद एयर इंडिया ने सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करते हुए विमान को ग्राउंड कर दिया। इंजीनियरिंग टीम ने विमान की तकनीकी जांच शुरू कर दी है ताकि किसी भी संरचनात्मक नुकसान का आकलन किया जा सके। इस घटना का असर अगली उड़ान पर भी पड़ा। बेंगलुरु से दिल्ली जाने वाली वापसी फ्लाइट AI2652 को रद्द करना पड़ा क्योंकि विमान उड़ान के लिए फिट नहीं माना गया। एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। एयरपोर्ट पर मौजूद ग्राउंड स्टाफ यात्रियों को दूसरी फ्लाइट्स और जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहा है।
आखिर कितना खतरनाक होता है Tail-Strike
एविएशन इंडस्ट्री में ‘टेल-स्ट्राइक’ को गंभीर घटना माना जाता है। इसका मतलब होता है विमान के पिछले हिस्से का रनवे से टकराना। ऐसी स्थिति टेकऑफ, लैंडिंग या गो-अराउंड के दौरान तब बनती है, जब विमान जरूरत से ज्यादा एंगल पर झुक जाता है। इससे विमान के ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है और कुछ मामलों में कंट्रोल खोने का भी खतरा रहता है।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक, अगर समय रहते पायलट स्थिति को संभाल न पाए तो विमान रनवे से बाहर भी जा सकता है। यही वजह है कि इस तरह की घटनाओं को बेहद संवेदनशील माना जाता है।
हादसे ने फिर उठाए एविएशन सेफ्टी पर सवाल
हाल के महीनों में भारतीय विमानन क्षेत्र में तकनीकी गड़बड़ियों और सुरक्षा घटनाओं की संख्या बढ़ने से यात्रियों की चिंता भी बढ़ी है। ऐसे में एयर इंडिया की इस घटना ने एक बार फिर फ्लाइट सेफ्टी और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस बार बड़ा हादसा टल गया, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि व्यस्त एयरपोर्ट्स पर बड़े विमानों के बीच सुरक्षित दूरी और एयर ट्रैफिक को लेकर ज्यादा सतर्कता जरूरी है। फिलहाल सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स के सुरक्षित होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन AI2651 की यह लैंडिंग कई लोगों के लिए लंबे समय तक डरावना अनुभव बनी रहेगी।