मराठी फिल्म ‘देऊल बंद 2’ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई कर रही है। अब फिल्म के मेकर्स ने बड़ा फैसला लेते हुए मुनाफे को आत्महत्या कर चुके किसानों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने का ऐलान किया है।
मराठी सिनेमा की फिल्म ‘देऊल बंद 2’ सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा ही रही है। इसके साथ ही अपने सामाजिक संदेश की वजह से भी चर्चा में है। करीब 60 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी इस फिल्म को लेकर अब एक ऐसा ऐलान हुआ है जिसने दर्शकों का ध्यान और ज्यादा खींच लिया है।
फिल्म के निर्देशक प्रवीण तारडे ने खुलासा किया है कि फिल्म से होने वाला पूरा मुनाफा उन किसानों के बच्चों की शिक्षा के लिए लगाया जाएगा, जिनके परिवारों ने किसान आत्महत्या जैसी त्रासदी का सामना किया है। ऐसे समय में जब फिल्मों की सफलता अक्सर कमाई के आंकड़ों तक सीमित रह जाती है, ‘देऊल बंद 2’ की कहानी पर्दे से निकलकर सामाजिक जिम्मेदारी तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
रिकॉर्ड कमाई ने बदली मराठी सिनेमा की तस्वीर
करीब 9.75 करोड़ रुपये के निर्माण बजट और लगभग 3 से 3.5 करोड़ रुपये के प्रचार-प्रसार खर्च के साथ बनी ‘देऊल बंद 2’ ने मराठी फिल्म इंडस्ट्री में नया इतिहास रच दिया है। फिल्म की कुल लागत 14 से 15 करोड़ रुपये के आसपास मानी जा रही है, जबकि इसकी कमाई 60 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिल्म अभी भी सिनेमाघरों में मजबूत प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में इंडस्ट्री से जुड़े लोग मान रहे हैं कि यह फिल्म 100 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली चुनिंदा मराठी फिल्मों में जगह बना सकती है।
छोटे कस्बों से मल्टीप्लेक्स तक उमड़ी भीड़
फिल्म की सफलता का सबसे दिलचस्प पहलू इसका दर्शक वर्ग है। केवल बड़े शहर ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी फिल्म को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। प्रवीण तारडे के मुताबिक शुरुआत में फिल्म लगभग 600 से 700 स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। पहले सप्ताह के भीतर स्क्रीन संख्या बढ़कर 2200 तक पहुंच गई। नई फिल्मों की रिलीज के बावजूद थिएटर मालिकों ने इसके शो कम करने के बजाय कई जगह बढ़ा दिए। यह ट्रेंड बताता है कि फिल्म को केवल स्टार पावर नहीं, बल्कि दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया आगे बढ़ा रही है।
किसानों के दर्द को कहानी का केंद्र बनाया
निर्देशक प्रवीण तारडे खुद किसान परिवार से आते हैं। उनका कहना है कि फिल्म की जड़ें महाराष्ट्र के ग्रामीण जीवन और किसानों की वास्तविक समस्याओं से जुड़ी हैं। फिल्म में किसानों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे को भावनात्मक और सामाजिक दृष्टिकोण से उठाया गया है। यही वजह है कि इसकी कहानी गांवों और खेती से जुड़े परिवारों के बीच गहराई से जुड़ती दिखाई दे रही है। तारडे का मानना है कि फिल्म का मूल संदेश उम्मीद और संघर्ष का है। यही कारण है कि यह दर्शकों के साथ भावनात्मक स्तर पर जुड़ने में सफल रही।
सिर्फ फिल्म नहीं, सामाजिक अभियान भी
फिल्म की सबसे बड़ी चर्चा इसकी कमाई नहीं, बल्कि उससे जुड़ा मानवीय फैसला बन गया है। निर्देशक ने बताया कि फिल्म के निर्माता कैलाश वाणी स्वयं किसान परिवार से जुड़े हैं और उन्होंने फिल्म से मिलने वाले पूरे मुनाफे को दान करने का निर्णय लिया है। इस राशि का उपयोग उन बच्चों की शिक्षा के लिए किया जाएगा, जिनके माता-पिता किसान आत्महत्या की घटनाओं का शिकार हुए हैं। कई परिवार आर्थिक संकट के कारण बच्चों की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। ऐसे में यह पहल सीधे उन बच्चों तक मदद पहुंचाने का प्रयास मानी जा रही है।
फिल्म की सफलता के पीछे छिपा बड़ा संदेश
‘देऊल बंद 2’ की सफलता केवल टिकट खिड़की पर मिले आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस कंटेंट की भी जीत है जो समाज के संवेदनशील मुद्दों को केंद्र में रखकर बनाया गया। एक तरफ फिल्म मराठी सिनेमा के लिए नए व्यावसायिक रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी तरफ इसकी कमाई का इस्तेमाल सामाजिक बदलाव के लिए करने का फैसला इसे बाकी फिल्मों से अलग पहचान दे रहा है। यही वजह है कि फिल्म को अब सिर्फ ब्लॉकबस्टर नहीं, बल्कि एक ऐसे प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है जिसने मनोरंजन और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच मजबूत पुल बनाने की कोशिश की है।