NEET-UG पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA को फटकार लगाई। कोर्ट ने जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई और UPSC सिस्टम से सीखने की सलाह दी।
NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई एक बार फिर सख्त टिप्पणियों के कारण चर्चा में आ गई है। अदालत ने साफ कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री खुद इस पूरे मामले पर नजर रख रहे हैं ताकि परीक्षा प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि केवल निगरानी से समस्या खत्म नहीं होगी।
कोर्ट की टिप्पणियों में सबसे अहम बात यह रही कि उसने परीक्षा प्रणाली की तुलना UPSC से करते हुए कहा कि वहां ऐसी पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने नहीं आतीं। इसी आधार पर कोर्ट ने NTA को अपनी कार्यप्रणाली सुधारने की सलाह दी।
UPSC मॉडल पर क्यों उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि UPSC जैसी संस्थाओं में पारदर्शिता और सिस्टम मजबूत होने की वजह से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होतीं। इसी मॉडल को देखते हुए कोर्ट ने NTA को अपनी व्यवस्था सुधारने की नसीहत दी। कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि आखिर राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बार-बार गड़बड़ी कैसे सामने आ रही है।
NTA की जवाबदेही पर केंद्रित हुई बहस
कोर्ट ने साफ कहा कि केवल सुधार के दावे काफी नहीं हैं, जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक समस्या खत्म नहीं होगी। अदालत ने केंद्र सरकार और NTA से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। NTA की ओर से बताया गया कि पेपर लीक के बाद सुरक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं, लेकिन कोर्ट ने इन दावों की ठोस समीक्षा पर जोर दिया। अदालत ने 2024 के पिछले मामलों और उनकी सिफारिशों का भी जिक्र किया और पूछा कि उन सुझावों पर कितनी गंभीरता से काम हुआ है।
छात्रों पर क्या असर पड़ा
NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी का सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ा है। इस परीक्षा के जरिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलता है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता बेहद अहम मानी जाती है। करीब 23 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था और गड़बड़ी की सूचना के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। कई छात्रों और संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार किया जाए या फिर पूरी संरचना को नया रूप दिया जाए।
सरकार का पक्ष और निगरानी का दावा
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है और 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को छह हफ्ते का समय दिया है ताकि वह एक मजबूत और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था का पूरा रोडमैप पेश कर सके। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं की प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित बन पाएगी या फिर यह बहस आगे भी जारी रहेगी।