NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि 2024 विवाद के बाद क्या सुधार किए गए और केंद्र व CBI से भी जवाब तलब किया।
नीट (NEET) पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखी टिप्पणी की है। साथ ही सवाल उठाया कि आखिर पिछली गलतियों से क्या सीखा गया। कोर्ट ने कहा कि 2024 के विवाद के बाद भी सुधार नजर नहीं आ रहे हैं। दरअसल, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच मेडिकल संगठनों और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान अदालत ने माना कि पहले भी इसी तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे और तब सुधारों के लिए कई सिफारिशें दी गई थीं।
अब कोर्ट ने NTA, केंद्र सरकार और CBI से जवाब मांगा है। ताजा पेपर लीक मामले ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को क्यों लगाई फटकार?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि 2024 में भी पेपर लीक विवाद सामने आया था। तब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे। कोर्ट ने कहा कि उन सिफारिशों को स्वीकार करने के बावजूद हालात दोबारा बिगड़ना बेहद दुखद है। बेंच ने NTA को निर्देश दिया कि वह गुरुवार तक हलफनामा दाखिल कर बताए कि पिछले निर्देशों पर क्या कार्रवाई की गई। यह टिप्पणी सीधे तौर पर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल मानी जा रही है।
CBI जांच में लगातार हो रही गिरफ्तारियां
पेपर लीक मामले में CBI की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। 25 मई को आरोपी मनीषा संजय हवलदार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक उन पर परीक्षा से पहले फिजिक्स पेपर लीक करने का आरोप है। इससे पहले आरोपी शुभम खैरनार को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। CBI का कहना है कि पेपर खरीदने और नेटवर्क चलाने वाले अन्य लोगों की पहचान के लिए पूछताछ अभी जारी है।
रिटायरमेंट से पहले फंसी फिजिक्स लेक्चरर
मामले में नाम आने के बाद महाराष्ट्र के स्कूल ‘सेठ हीरालाल सरस्वती प्रशाला’ ने सीनियर फिजिक्स लेक्चरर मनीषा हवलदार को सस्पेंड कर दिया। स्कूल प्रशासन के अनुसार मनीषा 1992 से संस्थान में पढ़ा रही थीं और 30 जून को रिटायर होने वाली थीं। उनके पास MSc और B.Ed की डिग्री है। इस खुलासे ने यह बहस भी तेज कर दी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक नेटवर्क में शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग किस तरह शामिल हो रहे हैं।
लाखों छात्रों के भविष्य पर असर
NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। इसी परीक्षा के जरिए MBBS, BDS, AYUSH और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है। देशभर में 1 लाख से ज्यादा MBBS और करीब 27 हजार BDS सीटों के लिए लाखों छात्र हर साल परीक्षा देते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं सीधे छात्रों के भरोसे और मेहनत पर असर डालती हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नजर इस बात पर है कि NTA और जांच एजेंसियां परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं।