Breaking News
  • देश के 10 राज्यों में इस हफ्ते तेज गर्मी, मौसम विभाग के मुताबिक 24 मई तक सभी राज्यों में हीटवेव का असर
  • काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़, 1KM लंबी लाइन लगी
  • भोपाल में पेट्रोल ₹110.75 प्रति लीटर, इंदौर में ₹110.79 हुआ; 5 दिन में दूसरी बार बढ़ी कीमतें
  • IPL- हैदराबाद प्लेऑफ में पहुंची, चेन्नई को 5 विकेट से हराया
  • पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा: दिल्ली में पेट्रोल 98.64 और डीजल 91.58 रुपए लीटर हुआ

होम > बिजनेस

EPF vs EPS Full Guide

EPF और EPS का पूरा गणित समझिए, आपकी सैलरी का पैसा कहां जा रहा है और कैसे बढ़ता है रिटायरमेंट फंड

EPF और EPS में फर्क क्या है, आपकी सैलरी से कितना पैसा कहां जाता है और रिटायरमेंट में क्या मिलता है। जानिए EPFO बैलेंस चेक करने का आसान तरीका और पूरी डिटेल।


epf और eps का पूरा गणित समझिए आपकी सैलरी का पैसा कहां जा रहा है और कैसे बढ़ता है रिटायरमेंट फंड

Business News |

हर महीने नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से कटने वाला PF सिर्फ एक कटौती नहीं है। यह सीधे रिटायरमेंट की सुरक्षा से जुड़ा सिस्टम है। लेकिन ज्यादातर लोग आज भी नहीं जानते कि उनका पैसा EPF और EPS में कैसे बंटता है और इसका फायदा कब मिलता है। EPFO के नियमों के मुताबिक कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 फीसदी EPF में डालता है। इसी के बराबर 12 फीसदी योगदान कंपनी भी देती है। लेकिन यही 12 फीसदी एक जगह नहीं जाता। यह पैसा दो हिस्सों में बंट जाता है और यहीं से EPF और EPS का फर्क शुरू होता है।

EPF और EPS में पैसा कैसे बंटता है

कंपनी का 12 फीसदी योगदान दो हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें 3.67 फीसदी EPF खाते में जाता है और 8.33 फीसदी EPS यानी पेंशन स्कीम में चला जाता है। यह नियम उन कर्मचारियों पर लागू होता है जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये तक होती है। इसी वजह से कई कर्मचारियों को अपने PF स्टेटमेंट में दो अलग-अलग एंट्री दिखाई देती हैं। EPF और EPS दोनों अलग-अलग मकसद के लिए बनाए गए हैं और इन्हें एक ही कानून EPF & MP Act 1952 के तहत मैनेज किया जाता है।

EPF और EPS में असली फर्क

EPF को एक लॉन्ग टर्म सेविंग अकाउंट की तरह समझा जा सकता है। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों पैसा डालते हैं और यह रकम समय के साथ बढ़ती रहती है। रिटायरमेंट के समय इसे एकमुश्त निकाला जा सकता है। इस पर सरकार हर साल ब्याज देती है जो 2025-26 के लिए 8.25 फीसदी तय है। वहीं, EPS पूरी तरह पेंशन सिस्टम है। इसमें कर्मचारी अपना पैसा नहीं डालता। सिर्फ कंपनी का हिस्सा जाता है। 58 साल की उम्र के बाद इसमें मासिक पेंशन मिलती है और कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को पेंशन जारी रहती है। EPS में कोई ब्याज नहीं जुड़ता।

EPF ब्याज कैसे तय होता है और कब खाते में जुड़ता है

EPF की ब्याज दर सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज तय करता है। इसमें सरकार, कर्मचारी और नियोक्ता तीनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। फाइनल रेट को वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद लागू किया जाता है। यह ब्याज हर साल 31 मार्च को खाते में जोड़ दिया जाता है और पासबुक में अपडेट होने के बाद दिखाई देता है। इस प्रोसेस के बाद ही कर्मचारी अपने अकाउंट में सालाना ग्रोथ देख पाते हैं।

EPFO बैलेंस चेक करने का आसान तरीका

EPF बैलेंस देखने के लिए सबसे आसान तरीका EPFO पासबुक पोर्टल है। यहां UAN और पासवर्ड से लॉगिन करके पूरी पासबुक देखी जा सकती है। इसके अलावा मोबाइल यूजर्स के लिए UMANG ऐप भी उपलब्ध है। ऐप में EPFO सर्विस चुनकर UAN डालना होता है और OTP वेरिफिकेशन के बाद पासबुक खुल जाती है। पासबुक में साफ दिखता है कि कितना पैसा जमा हुआ है और कितना ब्याज जुड़ा है।

रिटायरमेंट सिक्योरिटी का मजबूत सिस्टम

EPF और EPS दोनों मिलकर नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट का सेफ्टी नेट तैयार करते हैं। एक तरफ एकमुश्त फंड मिलता है और दूसरी तरफ हर महीने पेंशन की गारंटी रहती है। समस्या सिर्फ इतनी है कि ज्यादातर लोग अपनी सैलरी स्लिप में कटौती देखते हैं लेकिन सिस्टम को समझ नहीं पाते। सही जानकारी होने पर यह स्कीम भविष्य की सबसे मजबूत आर्थिक सुरक्षा बन सकती है।

Related to this topic: