श्रीराम जन्मभूमि के समतलीकरण के दौरान मिले शिवलिंग व प्राचीन कलाकृतियां

मुस्लिम पक्षकार नहीं मान रहे साक्ष्यों को

Update: 2020-05-22 06:01 GMT

नई दिल्ली/लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि के समतलीकरण के दौरान वहां मिले शिवलिंग व प्राचीन कलाकृतियों के साक्ष्य को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम संगठनों ने इसे प्रचार-प्रसार का नायाब तरीका बताया है। ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद कमिटी ने कहा कि शिवलिंग और जो भी प्राचीन कलाकृतियाँ वहाँ निकलने की बात की जा रही है। दरअसल, वह प्रचार-प्रसार की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। वामपंथी जमात और तथाकथित उदारवादी मीडिया ने तो कुछ साल पहले की अपनी रिपोर्ट में मंदिर की बात को नकार दिया था। यूपीए सरकार ने तो भागवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए थे। जब उच्चतम न्यायालय द्वारा श्रीरामजन्मभूमि को लेकर अपना एतिहासिक फैसला सुना दिया है। और अब खुदाई में मिलने वाले साक्ष्य बता रहे हैं कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर पहले से ही विद्यमान था। जिसे कालांतर में उपद्रवियों ने ध्वस्त कर दिया था। लेकिन मुस्लिम पक्ष अभी भी साक्ष्य को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

अयोध्या रामजन्मभूमि की सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता और ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद कमिटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने एक बार फिर बेतुका बयान दिया है। जिलानी ने कहा कि शिवलिंग और प्राचीन कलाकृतियों को अब ये लोग बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दूसरे चुनावों में फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल करेंगे। वहीं, यासूब अब्बास का कहना है कि ऐसे लोगों पर रोक लगानी चाहिए, जो कोरोना वायरस की महामारी के दौरान इन तरह के बातें कर रहे हैं। एक चैनल पर जफरयाब जिलानी ने कहा कि आकृतियाँ और अवशेष आज दिखाए जा रहे हैं, उन पर उच्चतम न्यायालय में पहले ही बात हो चुकी है। और वो पहले से ही वहाँ मौजूद थे।

गौरतलब है कि भगवान श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जहाँ खुदाई में प्राचीन अवशेष मिल रहे हैं। इस दौरान कई पुरातात्विक मूर्तियाँ, खंभे और शिवलिंग मिल रहे हैं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चम्पत राय ने कहा कि मलबा हटाने के दौरान कई मूर्तियाँ और एक बड़ा शिवलिंग भी मिला है।

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