आप न लिख दो, मैं हाँ कर दूँगा

अतुल तारे अनुराग उपाध्याय

Update: 2026-01-24 03:33 GMT

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्वदेश से खास चर्चा

मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दो साल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहते हैं- मैं जब मुख्यमंत्री बना, तो विचार किया कि हमारे बैठने से यहां क्या बदलाव आएगा? राजनीति हमारे लिए सेवा का माध्यम है इसलिए हमने लक्ष्य तय किए और काम कर रहे हैं। हमारा सारा फोकस निवेश और रोजगार पर है।

मुख्यमंत्री यादव ने नवाचार किया और रीजनल इंडस्ट्री समिट की श्रृंखला आयोजित कीं। इसका बेहतर प्रतिसाद मिला। अब जगह-जगह निवेश का माहौल बना है। वे मानते हैं कि रोजगार का मसला बड़ा है। इसलिए हमने सबसे पहले उस पर ही ध्यान दिया। हमारे यहां बहुत पद खाली पड़े थे तो सभी विभागों में भर्ती का काम शुरू किया गया। पीएससी का मामला लटका था तो एक साल में तीन पीएससी परीक्षाएं करवाई। ये पिछले बाईस से नहीं हुई थी। हर उस विभाग में पद भरे जा रहे हैं जहां अरसे से पद खाली थे। हम और पद भी सृजित कर रहे हैं। कोशिश है। हर विभाग में अचीवमेंट आना चाहिए। आज माइनिंग के सेक्टर में नंबर वन की स्थिति में आ गए हैं। बिजली के सेक्टर में सबसे सस्ती बिजली देशभर में हम बना और हम बेच रहे हैं। दो रुपए से दो रुपए दस पैसे का सबसे सस्ती बिजली और इस मामले में भी सरप्लस हैं। प्रदेश रिन्यूएबल एनर्जी में सरप्लस हो गया है। इंडस्ट्री ग्रोथ में हम आगे बढ़ रहे हैं। एग्रीकल्चर बहुत अच्छा हो गया, लेकिन इसमें भी आगे बढ़ रहे हैं।

पार्वती, काली सिंध परियोजना बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री कहते हैं नदी जोड़ो अभियान पर हम टारगेट लेकर चल रहे हैं। राजस्थान के साथ पानी के बंटवारे को लेकर हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा है। ये क्या मतलब? हमारा पानी तो बहकर के अरब सागर तक जा रहा है, बंगाल की खाड़ी जा रहा है, लेकिन राजस्थान को पानी क्यों नहीं देना? हमने दोनों प्रदेशों को एक भाव से देखा। हमारा पानी राजस्थान जा रहा है हमने तो वो कोई पाकिस्तान थोड़ी है। आते ही निर्णय किया कि भाई पांच प्रतिशत हमारे पास पानी ज्यादा है, थोड़ा दे भी देंगे तो क्या फर्क पड़ता है? तो आईएएस अधिकारियों ने कहा, नहीं साहब, हम राज्य के हितों के खिलाफ नहीं जा सकते। मैंने कहा, आप न लिख दो, मैं हाँ कर दूँगा। आपको नौकरी की चिंता है। मेरे को मेरे राज्य के साथ राजस्थान की भी चिंता है। मैंने कहा कि भाजपा की सरकारों का यह अंतर है कि एक तरफ दक्षिण के अंदर सालों से राज्यों के परस्पर संबंध इतने बिगड़े हुए हैं कि वो मुकदमे में उलझे पड़े हैं और यह सौहार्दपूर्ण संबंधों का यह उदाहरण है कि पार्वती, काली सिंध परियोजना आरम्भ हुई। फिर केंद्र के सहयोग से हमने उत्तर प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान के तहत महाराष्ट्र के | साथ ताप्ती नदी का समझौता किया।

दो मंत्रालय एक किए

क्या कुछ विसंगतियां भी मिलीं? इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- स्वास्थ्य के दो अलग-अलग मंत्रालय थे, उन्हें एक किया। एक ही स्वास्थ्य मंत्री जो चिकित्सा शिक्षा देखेगा और वो ही स्वास्थ्य मंत्रालय भी देखेगा। हमारे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला जी को यह काम दिया है। हमने कहा कि हमारी सरकार समग्र रूप से चलेगी तो हमारे पांच साल के बाद का अचीवमेंट क्या आएगा, उसके लिए लक्ष्य तय करना चाहिए। तो हमने लक्ष्य तय किया कि हमारे राज्य के अंदर जितना बजट है, इसको पांच साल में तो डबल करें। हमारा तीन लाख करोड़ के आसपास का बजट नाज हम चार लाख इक्कीस हजार करोड़ पर पहुंच ए हैं। दो साल में तीसरा बजट आने वाला है। इस पर थोड़ी जीएसटी कम हुई है, लेकिन फिर भी तो पांच साल में हम इसको डबल करने वाले हैं ताकि हमारी ग्रोथ दिखना चाहिए। हम कोई योजना बंद नहीं करेंगे और संकल्प पत्र में किए गए सभी वादे भी पूरे करेंगे।

समस्या नहीं, हम समाधान जानते हैं

मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुकते। वे कहते हैं ताजा उदाहरण देख लो। हमने सालों से पड़े यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निपटारा किया। हमारी मंशा थी यूनियन कार्बाइड का कचरा भी जलना चाहिए और इसका डेवलपमेंट भी होना चाहिए। इससे जुड़े सभी पक्षों का निराकरण भी करना चाहिए। भोपाल की पहचान एक मरा बच्चा उसकी खुली हुई आँख नहीं हो। भोपाल के नाम पर गूगल खोलो तो वो दिखता है। कितना गंदा लगता है। हम समाधान में रूचि रखने वाले हैं। इंदौर के हुकुमचंद मिल में तीस साल से ताला लगा हुआ है। सात हजार लोगों के पेमेंट का निराकरण नहीं हो रहा था। उम्मीद में दो हजार लोग तो मर ही गए कि उनको पैसे मिलेंगे, दो लाख, चार लाख। अब उसका निराकरण किया। उज्जैन में भी हीरा मिल, विनोद मिल, विमल मिल में हमने निराकरण किया। हम मजदूरों के भी साथ हैं। ऐसी बहुत सारी बातें बता सकता हूं कि हम समाधान खोज कर निराकरण करते हैं।

राहुल जिसके साथ, वो डूबा

संघ विचार मुख्यमंत्री यादव की बातों में साफ झलकता है। वे कहते हैं राहुल गांधी संघ और भाजपा को टारगेट करते करते अपनी पार्टी को हाशिए पर ले आए। राहुल गांधी क्या हैं, वो तो उन्हें खुद ही नहीं मालूम। उनकी समझ के लिए तो उनकी माताजी और उनके परिवार के लोग ही जवाबदार हैं। राहुल की एक दिक्कत ये भी है कि वो गरीब की गरीबी नहीं समझता, क्योंकि वो गरीब के परिस्थिति से कभी वाकिफ नहीं हुआ। देश में कम रहकर विदेश ज्यादा घूमता है तो देश के अंदर की जड़ों की समस्या उसको नहीं पता। दुर्भाग्य से कांग्रेस के अंदर एक आभामंडल बनाकर नेहरू परिवार के बाद गांधी नाम लेकर के बेवकूफ बनाने का जो दौर चला है, उसका सबसे बड़ा मॉडल राहुल गांधी हैं, जिसके कारण तीसरी बार कांग्रेस सरकार नहीं आई। फिर भी उनको यह समझ नहीं आ रही कि सरकार केवल उनके कारण से नहीं आ रही, कि उनके कार्य व्यवहार कारण से भी नहीं आ रही। जिनके साथ जाते हैं, राहुल उनकी नैया डुबा देते हैं। अभी ताजा उदाहरण बिहार का है। अब कौन जुड़ेगा इनके साथ?

घर में घुसकर मारते हैं

मुख्यमंत्री कहते हैं कि पहले केवल मुस्लिम तुष्टिकरण से सरकार बनती रही है, यह सबने देखा था, लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण के अलावा सरकार बनती है, यह मोदी जी ने करके दिखाया। पाकिस्तान के अलावा जितने मुस्लिम देशों ने मोदी जी का सम्मान किया, तो मैं मान के चलता हूं ये संघ संस्कार ही सम्मान है। वे कहते हैं पाकिस्तान को भी घर में घुस कर सबक देने का काम संघ के स्वयंसेवक ने किया है। अब हमारे देश के दुश्मनों से निपटने का जो तरीका हमारे देश ने अपनाया है। घर में घुस कर मरने का काम हमसे पहले सिर्फ अमेरिका और इस्त्रायल ने किया है।

हमारी स्वीकार्यता बढ़ी

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री कहते हैं अभी अभी हमने देखा महाराष्ट्र में जो समाचार आए तो वहां हमारी स्वीकार्यता बढ़ी है.बालासाहेब ठाकरे जी ने हिंदुत्व के आधार पर शिवसेना खड़ी की थी। लेकिन जिस प्रकार से तुष्टिकरण का मार्ग उद्धव और राज ठाकरे ने अपनाया तो जनता ने हमारी विचारधारा को पसंद किया और उन को धूल चटा दी। गुरुजी ने कहा था कोई जल्दी नहीं है.जो हमारे हैं, वो हमारे हैं, जो अभी हमारे नहीं हैं, वो कल हमारे हो जाएंगे। इतनी धैर्य, इतनी उदारता सौ साल बाद भी बनाए रखना। पुरानी परतें खोलते हुए डॉ. यादव बताते हैं एक बार मैंने चुनाव के लिए टिकिट नहीं लिया। में विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय मंत्री बना। दुनिया में कोई संगठन ऐसा नहीं सोच सकता और अगर ऐसा कोई संगठन सोचता है तो उसकी प्रगति कोई नहीं रोक सकता। अब आप अंदाजा लगा लो कि कहां मैं राष्ट्रीय मंत्री, प्रदेश मंत्री, राष्ट्रीय मंत्री दस साल तक लगातार रहा। फिर मेरे साथ के, मेरे बाद के भी लोग प्रदेश में भाजपा में सीधे बड़े पद पर आए। मेरे पहले राष्ट्रीय मंत्री नड्डा जी थे। युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। मेरे बाद राष्ट्रीय मंत्री थे धर्मेद्र प्रधान। वो युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। मेरे बाद के वीडी शर्मा प्रदेश अध्यक्ष बने, महामंत्री बने। मेरे बाद के ही अरविंद भदौरिया वो प्रदेश के पदाधिकारी बने, लेकिन मैं युवा मोर्चा के बाद जिले का महामंत्री बना। मन में स्वयंसेवक वाला भाव रहा कि जो काम मिले अच्छे से करो। मैने धुरंधर देखी नहीं। लेकिन में धुरंधर नहीं मैं मस्त कलंदर रहा।

किसी का मोह नहीं

मुख्यमंत्री यादव अपने नाम का अर्थ बताते हुए कहते हैं जिसे किसी का मोह न हो वो मोहन। मोदी जी खुद मोहन हैं। उनको कोई मोह नहीं है, उनके लिए देश प्रथम। हमारे लिए प्रदेश प्रथम। दो साल हो गए। सारी उपलब्धियां जनता ने देखी। अब भी बहुत गुंजाइश है, बहुत काम हैं, बहुत सारी चीजों को करने की संभावना है। किसानों के लिए कसक है। किसान को टमाटर आलू, प्याज सड़क पर क्यों फेंकना पड़े? उसका प्रोसेसिंग हो जाए, उसका लाभ उठा ले। उद्योग में इस बार किसान कल्याण वर्ष ले लिया तो किसान कल्याण केवल एग्रीकल्चर में ही है, हार्टिकल्चर में भी है, दूध के उत्पादन में भी है, मछली के उत्पादन में भी है,एमएसएमई में भी है, एनर्जी में भी है। सब क्षेत्रों में समान रूप से बढ़ाने के लिए किसान के आय के स्रोत बने क्योंकि कृषि उत्पादक हमारे यहां कृषि और किसानों के | साथ गांव के अंदर हमारे विकास की बात देखते हैं।

नक्सलवाद का खात्मा

मुख्यमंत्री नक्सवाद के खात्मे को बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उन्होंने बताया - मोदी जी ने पूछा नक्सलवाद पूरा खत्म हो गया, हमने बताया पूरा खत्म हो गया। पहले हमारे अधिकारी कह रहे कि जब आए थे नौकरी में, उसके पहले से आज तक सोच रहे थे सब इससे खत्म ही नहीं होगा। शुरू में मैंने बात की तो मेरे अधिकारी समझाते थे कि साहब यहां दस साल से कोई घटना ही नहीं हुई तो आप इसकी चिंता मत करो, यह अपने आप कुछ नहीं है। मैंने कहा, तुम एक कल्पना करो। बहुत बढ़िया मखमल के गद्दे वाला पलंग है, जिस पर आप सोओ और नीचे सांप घूम रहा है। आपको तो कभी नहीं काटा साहब, ऐसा तो नहीं न की कभी नहीं कटेगा। देर कैसे इसको मारो पहले या बाहर करो। मुझे इस बात की प्रसन्नता, हमारे अधिकारी, कर्मचारी सारे लोग मिले, आम जनता भी मिली, स्थानीय नेतृत्व ने भी मदद की। माननीय मोदी जी, अमित शाह जी ने लगातार मॉनिटरिंग की और हमने सबने मिलकर के संकल्प से इसको नक्सलवादी मूवमेंट से खत्म किया।

अभूतपूर्व होगा सिंहस्थ

सिंहस्थ के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ किसी एक का मेला नहीं है-न यह किसी व्यक्ति का है, न किसी सरकार, न किसी राज्य या देश का। यह पूरे विश्व का मेला है और विश्व के सबसे विशाल आयोजनों में से एक है। ऐसे में इसकी गरिमा और गौरव को बनाए रखना हमारा दायित्व है। सिंहस्थ का आयोजन हमारे लिए सौभाग्य की बात है और हमारी सरकार के लिए तो यह सोने पर सुहागा है, क्योंकि मैं स्वयं उज्जैन से आता हूँ, जहाँ सिंहस्थ होता है। उज्जैन जैसे सात ऐसे नगर हैं, जो भगवान राम के काल से, भगवान श्रीकृष्ण के काल से, उनसे पहले और बाद के हर युग में रहे हैं और आज भी जीवंत है। इसीलिए हमारा प्रयास है कि इन नगरों का ऐसा स्थायी और सुदृढ़ प्रबंधन हो कि केवल बारह वर्षों में एक बार ही नहीं, बल्कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएँ और हम सुचारु व्यवस्था कर सकें। यह दृष्टि अस्थायी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार इसी सोच के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

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