अगले तीन साल में भारत एक और मील का पत्थर हासिल करने वाला है। साल 2030 तक भारत अपर-मिडिल-इनकम ग्रुप यानी ‘उच्च-मध्यम आय वाला देश’ बन जाएगा। इस तरह वह चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों की कतार में खड़ा होगा। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
एसबीआई रिसर्च स्पष्ट करता है कि भारत अब ‘रीफॉर्म थकान’ के दौर से निकलकर ‘रीफॉर्म डिविडेंड’ के चरण में प्रवेश कर चुका है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। यह अनुमान भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) में लगातार बढ़ोतरी और जीडीपी के विस्तार पर आधारित है।
भारत की आर्थिक कहानी अब केवल अनुमानों, आकांक्षाओं या राजनीतिक बहसों तक सीमित नहीं रही। यह कहानी अब ठोस आंकड़ों की है। ऐसे आंकड़े, जो देश के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता को भी मजबूत कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में भारत ने बीते एक दशक में जो तेज आर्थिक छलांग लगाई है, वह अब ठोस आंकड़ों की भाषा में बोल रही है। भारत की अर्थव्यवस्था आज जिस गति से दौड़ रही है, वह किसी संयोग का परिणाम नहीं है और न ही केवल वैश्विक परिस्थितियों की देन है, बल्कि यह उस दूरदर्शी नेतृत्व का नतीजा है, जिसने नीति, नीयत और नज़र इन तीनों को एक ही दिशा में खड़ा कर दिया है।
आज भारत की जीडीपी ग्रोथ न केवल दुनिया में सबसे तेज है, बल्कि यह स्थायी, संतुलित और भविष्य-उन्मुख भी है। यही वजह है कि वैश्विक मंदी, युद्ध और अस्थिरताओं के बीच भी भारत की इकोनॉमी जेट स्पीड से आगे बढ़ रही है, जबकि कई विकसित देश रनवे पर ही हांफते दिख रहे हैं।
एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट बताती है कि यह वही भारत है, जो 2014 में दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की सीमाओं में घिरा हुआ था। आज वही भारत चार ट्रिलियन डॉलर की दहलीज पार करने को तैयार है और 2028 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने जा रहा है। यह परिवर्तन केवल आकार का नहीं, बल्कि संरचना का है।
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने भारत को ‘वेलफेयर स्टेट’ से आगे बढ़ाकर ‘वर्कफेयर स्टेट’ की दिशा में मोड़ा, जहां सब्सिडी भी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनी और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ समावेशी विकास हुआ।
दुनिया की प्रमुख रेटिंग एजेंसियां और वित्तीय संस्थान आज जिस भरोसे के साथ भारत की ओर देख रहे हैं, वह भरोसा अचानक पैदा नहीं हुआ। जीएसटी, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, पीएलआई स्कीम, रिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और वित्तीय अनुशासन जैसे उपायों ने मिलकर भारत की आर्थिक नींव को इतना मजबूत कर दिया है कि अब झटके उसे गिरा नहीं सकते।
मूडीज द्वारा 7 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का अनुमान और एसबीआई रिसर्च का यह आकलन कि भारत अगले दो से तीन वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, उसी भरोसे की आधिकारिक मुहर है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विकास केवल कॉर्पोरेट बैलेंस शीट तक सीमित नहीं है। बढ़ता मिडिल क्लास, उभरता अपर-मिडिल इनकम समूह और 2030 तक भारत का उच्च-मध्यम आय वाला देश बनने का अनुमान इस बात का संकेत है कि आर्थिक विकास अब आम जीवन में उतर चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने भारत को आज उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां विकास कोई नारा नहीं, बल्कि रोजमर्रा का अनुभव बनता जा रहा है।