नए बजट को कई बातें खास बनाती हैं। इनमें आम आदमी को छेड़े बिना राजस्व जुटाने की व्यवस्था शामिल है। इसी की दम पर वित्तमंत्री राजकोषीय घाटे को पहले 4.4 प्रतिशत और नए बजट में 4.3 फीसदी रखने पर भरोसा जता रही हैं। क्रेडिट एजेंसियों और विदेशी निवेशकों को यह बात पसंद आएगी। बजट से संकेत हैं, निजी निवेश के इंतजार के भरोसे न बैठकर खुद फंट फुट पर आकर खेलना और रिकॉर्ड खर्च के बाद भी राजकोष पर नियंत्रण। यह पहली बार है, जितना अहा सरकार लेगी वह आधारभूत संरचना पर होने जा रहे खर्च से कम होगा। असल में आर्थिक सर्वे आने के बाद स्वदेश ने जैसा अनुमान लगाया था, बजट उसी लाइन पर है। जीएसटी कट और
पिछले बजट में आयकर में बड़ी राहत के बाद वित्तमंनी के हाथ बंधे थे। मगर लक्ष्य साफ था। विज़न 2047. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के पहले 40 सैकेंड छोड़ दें, जब वह हल्के तनाव में नज़र आंई। उसके बाद पूरे आत्मविश्वास के साथ उन्होंने बजट सामने रखा। वित्तमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, आमजन पर बोझ बढ़ाए बिना राजस्व बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना। ऐिसा करना बेहद जरूरी है। चूंकि विज़न 2047 केन्द्र सरकार का लक्ष्य है इसलिए सरकार ने इस बार आमदनी बढ़ाने के लिए प्रतिभूति लेन देन कर को चुना। वायदा में 150 फीसदी और विकल्प में 50 प्रतिशत कर बढ़ा दिया। बायबैक को अब पूंजीगत लाभकी तरह देखा जाएगा। यह निवेशकों के लिए फायदे की
बात है। ध्यान देने वाली बात यह है, वित्तवर्ष 2025-26 में एसटीटी से उतना कर नहीं मिल सका है जितना सरकार को लगता था। ट्रेडरों के लिए भले यह जोर का झटका हो लेकिन आम आदमी पर रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता। इसीलिए बजट आचार्य चाणक्य की नीति से मेल खाता है। चाणक्य कहते हैं, राजा को आम आदमी से टैक्स ऐसे लेना चाहिए जैसे मधुमक्खी फूलों से पराग लेती है। भले ही शेयर बाजार इससे नाराज हुआ हो, मगर सीतारमण ने एक तीर से दी शिकार कर लिए।
पहला, आम आदमी को छोड़कर टैक्स के लिए शेयर बाजार के प्रतिभागियों को चुना। दूसरा, छोटे निवेशकों को वायदा एवं विकल्प कारोबार से दूर रहने का संकेत दिया। सेबी की रिपोर्ट बताती है, हर 10 में से 9 ट्रेडर पूंजी गंवाते हैं। सरकार लगातार इन्फास्ट्रक्रर पर खर्च कर रही है। इस बार इसे 1.10 लाख करोड़ से बढ़ाया गया है।
बजट की यह खासियत है, आधारभूत संरचना पर रिकॉर्ड 12.10 लाख करोड़ रुपए खर्च करना। इसके उलट सरकारी ऋण में कमी। सरकार ने 11 लाख करोड़ कर्ज लेने का अनुमान लगाया है। इसका अर्थ है, त्रा का उपयोग दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण में होगा। सामान्य सिद्धांत है, इन्का पर एक रुपए का खर्च अर्थव्यवस्था में 8 रुपए के बराबर असर पैदा करता है। बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। भले ही व्यक्तिगत आयकर में इस बार कोई राहत न हो लेकिन उद्योगों पर न्यूनतम वैकल्पिक आयकर 15 प्रतिशत से घटाकर 14 फीसदी कर दिया है। स्थानीय निकाय मजबूत बनें। इसके लिए निकाय खुद धन का प्रबंध बांड के जरिए करें। प्रोत्साहन के लिए 100 करोड़ रुपए उन निकायों को मिलेंगे जो एक हजार करोड़ तक की राशि जुटाना चाहते हैं। निश्चित रूप से यह पैसा भी शहरी इन्फास्ट्रक्कर में जाएगा। रक्षा बजट 80 हजार करोड़ से बढ़ा दिया है। उम्मीद की जा सकती है, व्यापारी, किसान, युवा एवं महिलाओं के लिए बजट में बड़े ऐलान विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे।